अत्यन्त संक्षेप में रामायण ———————-
प्रथमहिं अति अनुराग भवानी ,राम चरित सर कहेसि बखानी
पुनि नारद कर मोह अपारा ,कहेसि बहुरि रावण अवतारा
प्रभु अवतार कहा पुनि गाई,तब सिसु चरित कहेसि मन लाई
बाल चरित कहि बिबिध बिधि,मन महँ परम उछाह
ऋषि आगवन कहेसि पुनि ,श्री रघुबीर बिबाह
बहुरि राम अभिषेक प्रसंगा,पुनि नृप वचन राज रास भंगा
पुर बासिन कर बिरह बिषादा ,कहेसि राम लछिमन संवादा
बिपिन गावं केवट अनुरागा,सुरसरि उत्तर निवास प्रयागा
बालमीक प्रभु मिलान बखाना,चित्रकूट जिमि बेस भगवाना
सचिवागवन नगर नृप मारना,भरता गवन प्रेम बहु बरना
करी नृप क्रिया संग पुरवासी ,भरत गये जहँ प्रभु सुख रासी
पुनि रघुपति बहुबिधि समुझाए ,लै पादुका अवधपुर आये
भरत रहनि सुरपति सूत करनी ,प्रभु अरु अत्रि भेट पुनि बरनी
कहि बिराध वध ,जेहि बिधि देह तजि सरभंग
बरनी सुतीछन प्रीती पुनि ,प्रभु अगस्ति सतसंग
कहि दण्डक बन पावनताई,गीध मयॆत्रि पुनि तेहि गाई
पुनि प्रभु पंचवटी कृत बासा,भंजी सकल मुनिन्ह की त्रासापुनि लछिमन उपदेस अनूपा , सूपनखाँ जिमि कीन्ह कुरूपा
खरदूषण बध बहुरि बखाना,जिमि सब मरमु दसानन जानापुनि नारद कर मोह अपारा ,कहेसि बहुरि रावण अवतारा
प्रभु अवतार कहा पुनि गाई,तब सिसु चरित कहेसि मन लाई
बाल चरित कहि बिबिध बिधि,मन महँ परम उछाह
ऋषि आगवन कहेसि पुनि ,श्री रघुबीर बिबाह
बहुरि राम अभिषेक प्रसंगा,पुनि नृप वचन राज रास भंगा
पुर बासिन कर बिरह बिषादा ,कहेसि राम लछिमन संवादा
बिपिन गावं केवट अनुरागा,सुरसरि उत्तर निवास प्रयागा
बालमीक प्रभु मिलान बखाना,चित्रकूट जिमि बेस भगवाना
सचिवागवन नगर नृप मारना,भरता गवन प्रेम बहु बरना
करी नृप क्रिया संग पुरवासी ,भरत गये जहँ प्रभु सुख रासी
पुनि रघुपति बहुबिधि समुझाए ,लै पादुका अवधपुर आये
भरत रहनि सुरपति सूत करनी ,प्रभु अरु अत्रि भेट पुनि बरनी
कहि बिराध वध ,जेहि बिधि देह तजि सरभंग
बरनी सुतीछन प्रीती पुनि ,प्रभु अगस्ति सतसंग
कहि दण्डक बन पावनताई,गीध मयॆत्रि पुनि तेहि गाई
पुनि प्रभु पंचवटी कृत बासा,भंजी सकल मुनिन्ह की त्रासापुनि लछिमन उपदेस अनूपा , सूपनखाँ जिमि कीन्ह कुरूपा
दसकंधर मारीच बतक ही ,जेहि बिधि भई सो सब तेहि कही
पुनि माया सीता कर हरना,श्री रघुबीर बिरह कछु बरना
पुनि प्रभु गीध क्रिया जिमि कीन्ही,बध कबंध सरिहि गति दीन्ही
बहुरि बिरह बरनत रघुबीरा,जेहि बिधि गए सरोवर तीरा
प्रभु नारद सम्बाद कहि मारुति मिलान प्रसंग
पुनि सुग्रीव मिताई बालि प्राण कर भंग
कपिहि तिलक करि प्रभु कृत सैल प्रबरषन बास
बरनन बर्षा सारद अरु राम रोष कपि त्रास
जेहि बिधि कपिपति कीज़ पठाये सीता खोज सकल दिसि धाए
बीबर प्रबेस कीन्ह जेहि भाँती ,कपिन्ह बहोरि मिला सम्पाती
सुनी सब कथा समीर कुमार,नाघत भयउ पयोधि अपारा
लंका कपि प्रबेस जिमि कीन्हा,पुनि सीतहि धीरजु जिमि दीन्हा
बन उजारि रावनहि प्रबोधि ,पर दहि नाघेउ बहुरि पयोधिआए कपि सब जहँ रघुराई ,वैदेही की कुसल सुनाई
सेन समेत जथा रघुबीरा उतरे जाइ बारानिधि तीरा
मिला विभीषण जेहि बिधि आई ,सागर निग्रह कथा सुनाई
सेतु बाँध कपि सेन जिमि ,उतरी सागर पार
गयउ बसीठी बीरबर,जेहि बिधि बालिकुमार
निसिचर कीस लड़ाई बरनिसी बिबिध प्रकार
कुम्भकरण घननाद कर बल पौरष संघार
निसिचर निकर मरण बिधि नाना,रघुपति रावण समर बखाना
रावण बढ़ मंदोदरी सोका,राज विभीषण देव असोका
सीता रघुपति मिलान बहोरी,सुरन्ह कीन्हि अस्तुति कर जोरी
पुनि पुष्पक चढ़ि कपिन्ह समेता अवध चले प्रभु कृपा निकेता
जेहि बिधि राम नगर निज आये ,बायस बिसद चरित सब गाये
कहेसि बहोरी राम अभिषेका ,पर बरनन नृप नीति अनेक
कथा समस्त भिसुंड बखानी ,जो मैं तुम्ह सन कही भवानी
सुनि सब राम कथा खगनाहा ,कहत बचन मन परम उछाहा
श्री राम जय राम जय जय राम
मिला विभीषण जेहि बिधि आई ,सागर निग्रह कथा सुनाई
सेतु बाँध कपि सेन जिमि ,उतरी सागर पार
गयउ बसीठी बीरबर,जेहि बिधि बालिकुमार
निसिचर कीस लड़ाई बरनिसी बिबिध प्रकार
कुम्भकरण घननाद कर बल पौरष संघार
निसिचर निकर मरण बिधि नाना,रघुपति रावण समर बखाना
रावण बढ़ मंदोदरी सोका,राज विभीषण देव असोका
सीता रघुपति मिलान बहोरी,सुरन्ह कीन्हि अस्तुति कर जोरी
पुनि पुष्पक चढ़ि कपिन्ह समेता अवध चले प्रभु कृपा निकेता
जेहि बिधि राम नगर निज आये ,बायस बिसद चरित सब गाये
कहेसि बहोरी राम अभिषेका ,पर बरनन नृप नीति अनेक
कथा समस्त भिसुंड बखानी ,जो मैं तुम्ह सन कही भवानी
सुनि सब राम कथा खगनाहा ,कहत बचन मन परम उछाहा
श्री राम जय राम जय जय राम
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