जो मनुष्य अपने क्रोध को अपने ही ऊपर झेल लेता है वही दूसरों के क्रोध से बच सकता है और अपने जीवन को सुखी बना सकता है —सुकरात

तरह तरह के कुविचार हमारी शांति सुख और विजय के घोर शत्रु हैं —स्वेत मोर्टन

जिस वास्तु को खरीदना आवश्यक न हो और उसे खरीदे बगैर काम चल सके उसे न खरीदो
जहाँ जाना आवश्यक न हो और वहां जाए बगैर काम चल सके वहां न जाओ
जो वस्तु खाए बगैर काम चल सके और आवश्यक न हो उसे न खाओ
जो पहनना आवश्यक न हो और उसके बगैर काम चले वह न पहनो

The essence of knowledge is having it to apply it not having it to confess your ignorance —Confucius

Read it from both sides —-
AbLE WAS I ERE I SAW ELBA

व्यक्ति छोटा हो या बड़ा किसी प्रतिष्ठा के पद पर हो या सामान्य ,निर्धन हो या धनवान उसके प्रति आपका सम्बोधन आदरणीय होना आवश्यक है

The brain may devise laws for the blood but a hot temper leaps over a cold decree —-Shakespeare

सुख में सुमिरन ना किया दुःख में करता याद रे कबीरा ऐसे भगत की कौन सुने फ़रियाद रे

The mark of Wisdom is to read aright the present and to march with the occasion—Homer



वाल्मीकि —–
दुखी व्यक्ति प्रतयेक पाप कर सकता है
ऐसा सोच कर दुखी न हो कि विधाता का लिखा हुआ मिटाया नहीं जा सकता

यदि सेवक सुख चाहे,भिखारी मान  चाहे ,व्यसनी धन चाहे ,लोभी यश चाहे तो समझ लो ये लोग आकाश से दूध दुहना चाह रहे हैं

अत्यधिक रगड़ने से चन्दन में भी आग निकलने लगाती है इसी तरह अत्यधिक अवज्ञा किये जाने पर ज्ञानी के हृदय में भी क्रोध उपज सकता है

नीच की नम्रता के प्रति सावधान रहो अंकुश ,धनुष ,सांप और बिल्ली झुक कर ही वार करते हैं

जुआरी भाट बदचलन नारी जिस आदमी की प्रशंसा करे समझ लो वह जीता हुआ भी मृत है

संत स्वभाव के व्यक्ति दूसरों को दुःख से बचाने के लिए कष्ट सहते हैं जबकि दुष्ट लोग दूसरों को दुःख में डालने के लिए स्वयं कष्ट सहते हैं

अभिमान मोह का मूल है तथा अत्यधिक कष्टदायक भी

मोह वश प्रियजनों से भी अत्यधिक अत्यधिक प्रेम करने से यश चला जाता है

कालिदास —

संदेह के समय मनुष्य के भीतर की आवाज ही उसे सत्य का मार्ग सुझाती है

अवगुण नाव के पाल में छेद के सामान है ,छेद छोटा हो या बड़ा एक न एक दिन नाव को ले ही डूबेगा

पेड़ अपने सर पर धुप सह लेता है परन्तु अपने शरण में आये हुए को छाया देता रहता है

हंस पानी मिले दूध में से दूध पि लेता है और पानी छोड़ देता है

बादलों की तरह सज्जन भी जिस वस्तु को ग्रहण कर लेते हैं उसका दान भी करते हैं

फलों से ल द कर वृक्ष झुक जाते हैं जल से भर कर बादल झुक जाते हैं और संपत्ति वां होने पर सज्जन  विनम्र हो जाता है

विकार उत्पन्न करने वाली परिस्थिति में रह कर भी जिसका चरित्र विकारग्रस्त नहीं होता वही वास्तविक धीर पुरुष है

दृढ निश्चय वाले मन को तथा नीचे की ओर बहते जल की गति को रोक पाना बहुत कठिन है

दुष्ट को उपहार से नहीं अपकार से ही शांत करना चाहिए

संसार में कभी कोई ऐसा व्यक्ति नहीं हुआ होगा जिसे जीवन भर सिर्फ सुख या सिर्फ दुःख ही मिला हो।  सुख और दुःख तो रथ के दो पहियो की तरह हैं कभी एक ऊंचा कभी दूसरा

विवेकानंद —-

गुलामी को कर्तव्य समझ लेना कितना आसान है

दुनिया क्या कहेगी ऐसा सोचना ही कमज़ोरी है तुम्हे खुद जो अच्छा जान पड़ता है वही करो जीवन का रहस्य यही है

अपने पूर्वजों के खोदे गए कुँए का खरा पानी पीकर दूसरों के मीठे पानी का त्याग करने वाले बहुत से मूर्ख इस संसार में घूमते फिरते हैं

किसी भी मनुष्य का सही मूल्यांकन करना हो तो उसकी त्रुटियों या कमज़ोरियों को उस समय अलग कर के फेंक दो क्योंकि ये चीजें उसकी अपनी नहीं हैं। त्रुटियाँ तो मानव मात्र की सामान्य दुर्बलताएँ हैं महान सद्गुण ही मानव की अपनी चीजें होतीं हैं

असंतुष्ट व्यक्ति के लिए सारे कर्तव्य नीरस हो जाते हैं

मैं संस्कारों में विश्वास नहीं करता मुझे तो स्वाभाविक उन्नति में आस्था है

प्रकृति के अनुरूप होकर नहीं बल्कि प्रकृति से संघर्ष करके ही मनुष्य ने प्रगति की है

जो व्यक्ति अपने आप से घृणा करने लगा है समझलो उसका अंत आ पहुंचा है

पुराने धर्म में नास्तिक उसे कहते थे जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता था परन्तु नया धर्म उसे नास्तिक कहता है जिसे स्वयं में विश्वास नहीं

जब तक मत छुओ वाद तुम्हारा धर्म है रसोई का बर्तन तुम्हारा देवता है तब तक तुम्हारी आध्यात्मिक  उन्नति नहीं हो सकती

टैगोर —–

निरर्थक आशा से बंधा मनुष्य अपना ह्रदय सुखा डालता है और आशा की कड़ी टूटते ही स्वयं टूट कर गिरता है

अन्याय सह जाने वाला भी अपराधी है क्योंकि अगर अन्याय न सहा जाय तो कोई किसी पर अन्याय कर ही न पाये

सजा देने का अधिकार सिर्फ उसीको है जो प्रेम करता है

मनुष्य स्वयं अपने को बंधन में डालता है

करते करते रह कर ही हम कर्म से महान हो सकते हैं परित्याग या पलायन करके किसी भी प्रकार संभव नहीं

अगर गलतियों को रोकने के लिए दरवाजे ही बंद कर दोगे तो सत्य बाहर ही रह जाएगा

ठोकरें सिर्फ धूल उड़ाती हैं धरती से फसल नहीं उगा सकतीं

संसार में अपना पराया कोई नहीं जो जिसको अपना समझता है वह अपना है और जो पराया समझता है वह अपना  होते हुए भी पराया है

जो शांतिपूर्वक सबकुछ सहन किये चले जाते हैं उनके बारे में यह निश्चित है की उन्हें भीतरी चोट बहुत गहरी पहुंची हुई है

हर पल जो नवीन दिखाई दे वही सुंदरता का उत्कृष्ट नमूना है

प्रेमचंद —

जो वास्तु आनंद प्रदान नहीं कर सकती वह सुन्दर नहीं हो सकती और जो सुन्दर नहीं वह सत्य नहीं हो सकती अतः आनंद ही सत्य है

अन्याय को मिटाओ लेकिन अपना आप मिटा कर नहीं

घमंडी मनुष्य ही प्रायः शक्की हुआ करते हैं

कोई जन्म से ही अच्छा या बुरा नहीं होता यह सब परिस्थितियों पर निर्भर है

अतीत चाहे दुखद ही क्यों न हो उसकी स्मृतियाँ मधुर होतीं हैं

एकांतवास शोक की आग पर हवा का काम करता है

अगर झूठ बोलने से किसी की जान बचती हो तो झूठ बोलना पाप नहीं पुण्य है

आत्म सम्मान की रक्षा हमारा पहला कर्तव्य है

आत्मा की हत्या करके मिला स्वर्ग भी नरक है

कमज़ोर और गरीब होना संसार में सबसे बड़ा पाप है

अनुभव सिखाने के लिए विपत्ति से बड़ा विद्यालय आज भी नहीं खुला है

संसार में सबसे बड़ा अधिकार सेवा और त्याग से मिलता है

अन्याय में सहयोग देने वाला उतना ही बड़ा अन्यायी है

आलस्य वह राज रोग है जिसका रोगी कभी नही सम्हलता
शरत चन्द्र —–

अति संयम भी एक प्रकार का असंयम है

मनुष्य का मारना मुझे उतनी चोट नहीं पहुंचता जीतनी की मनुष्यत्व की मृत्यु

बड़ा प्रेम सिर्फ पास नहीं खींचता दूर भी ठेल देता है

कोई किसी के मन की बात जान सकता है तो केवल प्यार और सहानुभूति के द्वारा न की उम्र और बुद्धि के बल से

पुराना होना ही पवित्र होना नहीं ,सत्तर साल का पुराना आदमी दस साल के बच्चे की तुलना में पवित्र नहीं होता

दुःख सुख कुछ भी सत्य नहीं है सत्य हैं सिर्फ जीवन के चंचल क्षण

तमाम बड़ी चीजें आदमी के हाहाकार से पैदा होती हैं

धर्म में कट्टरपन का गर्व करने से बढ़ कर लज्जा तथा बर्बरता की बात और कोई हो नहीं सकती

बहुत सी बड़ी चीजों को खोकर ही समझ पाते हैं

सबसे जीवंत रचना वह है जिसे पढने से साफ़ लगे कि लेखक ने अपने अंतर का सबकुछ फूल की तरह प्रस्फुटित कर के रख दिया है

जो असुंदर है वह अनैतिक भी है और अकल्याणकारी भी

यदि जाति और कुल ही सत्य हैं तो फिर क्या व्यक्तियों के सारे जीवन का सुख दुःख झूठ है

गेटे—-

संसार महान व्यक्तियों के बिना नहीं रह सकता लेकिन महान व्यक्ति संसार के लिए बहुत दुखदायी होते हैं

उस कर्तव्य का पालन करो जो तुम्हारे निकटतम है

नारी एक ईश्वरीय उपहार है जो स्वर्ग खो जाने की क्षतिपूर्ति स्वरुप पुरुष को प्रदान किया गया

जानना काफी नहीं जानने से लाभ उठाना चाहिए

संसार में प्रतिध्वनियाँ बहुत है ध्वनियां बहुत कम

स्वार्थी व्यक्ति निश्चित रूप से ईर्ष्यालु होता है

जो प्रयत्न करता है उससे भूल भी होती है

जिस काम को तुम करना चाहते हो उसे शुरू कर दो साहस में प्रतिभा शक्ति और जादू है सिर्फ काम में जुट जाओ आरम्भ करो ,काम समाप्त हो जाएगा

साहित्य का पतन राष्ट्र के पतन का द्योतक है

जो अपने ऊपर शासन नहीं करेगा वह सदा दूसरों का गुलाम रहेगा

उत्तम विचार बच्चों की तरह बेधड़क व अचानक सामने आ खड़े होते हैं और चिल्ला कर कह उठाते हैं हम यहाँ हैं

वह बड़ा सौभाग्यशाली है जो अपनी इच्छाओं और शक्ति के बीच की खाई की चौड़ाई को जल्दी जान लेता है