जेहि विधि प्रभु प्रसन्न मन होई
करुणा सागर कीजिये सोई
करुणा सागर कीजिये सोई
जो कठोर से कठोर दुःख में भी आंसूं नहीं लाता वही महामानव है,उमड़ते हुए हृदय को जिसने समय के
सत्य से रोक लिया वह अजेय है ,जीवन एक हवनकुंड है जिसमे धुप से भी अधिक तपन होती है। निराशा
के गीत गा गाकर रोने वाले जीवन का दांव हार बैठते हैं —“आग और पानी”रघुवीर शरण मिश्र
जब कभी मनुष्य को दुःख होता है अपने ही भ्रम के कारण होता है यदि मन में भ्रम न रहे तो उसे किसी का
भय न रहे “विराटा किपद्मिनी”वृन्दावन लाल वर्मा
सत्य की निरंतर खोज करते रहना जहाँ मानव का सहज स्वभाव है वहां यह भी सत्य है कि वह खोज
अत्यंत कठिन है और उसमे सबको एक जैसी सफलता नहीं मिलती। जितना ही मनुष्य अपने शरीर मन
आदि पर काबू पा सकेगा जितनी ही अविकल तथा निर्मल उसकी सत्य साधना होगी उतना ही वह अपने
शोध में बढ़ेगा —“सर्वोदय” जयप्रकाश नारायण
भंवरों में फस जाना मानवीय दुर्बलता है परन्तु भंवर का अनुमान किनारे पर बैठ कर न लगाइये ,जल में
डुबकी लगा कर देखिये “डॉ देव “अमृता प्रीतम
मनोवृत्ति का परिवर्तन हमारी असली विजय है —प्रेमचंद
प्रार्थना——
प्रभु तेरे हर दिन गन गांऊ
तू है फूल और पति मैं
तेरी ज्योत जले बाती मैं
तू ही सबके मन का वासी
तुझको शीश नवाऊँ !
तू है फूल और पति मैं
तेरी ज्योत जले बाती मैं
तू ही सबके मन का वासी
तुझको शीश नवाऊँ !
तन मन सदा शुद्ध हो मेरा
मुझे न घेरे कभी अँधेरा
मातृभूमि की सेवा में ही
जीवन सुमन चढ़ाऊं!
मुझे न घेरे कभी अँधेरा
मातृभूमि की सेवा में ही
जीवन सुमन चढ़ाऊं!
सारा जग तेरी फुलवारी
फूल फूल की शोभा न्यारी
तेरी इस फुलवारी को प्रभु
वॉर दे अधिक सजाऊँ
प्रभु तेरे हर दिन गुण गाऊं
फूल फूल की शोभा न्यारी
तेरी इस फुलवारी को प्रभु
वॉर दे अधिक सजाऊँ
प्रभु तेरे हर दिन गुण गाऊं
कबीरा ते नर अंध हैं
गुरु को कहते और
हरी रूठे गुरु ठौर है
गुरु रूठे नहीं ठौर
गुरु को कहते और
हरी रूठे गुरु ठौर है
गुरु रूठे नहीं ठौर
Talents are best nurtured in solitude character is best formed in the stormy billows of the
world —Goethe
I do not want an earthtly kingdom
I do not want a celestial paradise
I do not want a blissful state of the future
But I want to lighten the load of sorrow
Which weighs on the whole creation
at least to a little extent —-Radhakrishnan
I do not want a celestial paradise
I do not want a blissful state of the future
But I want to lighten the load of sorrow
Which weighs on the whole creation
at least to a little extent —-Radhakrishnan
भावमिच्छति सर्वस्य नाभावे कुरुते मनः
सत्यवादी मृदुर्दन्ता यः स उत्तम पुरुषः
जो सबका कल्याण चाहता है किसी के अकल्याण की बात भी मन में नहीं लता ,जो सत्यवादी ,कोमल व
सत्यवादी मृदुर्दन्ता यः स उत्तम पुरुषः
जो सबका कल्याण चाहता है किसी के अकल्याण की बात भी मन में नहीं लता ,जो सत्यवादी ,कोमल व
जितेन्द्रिय है वही उत्तम पुरुष है
जो यह मानता है कि पैसे से कुछ भी पाया जा सकता है वह पैसा पाने के लिए कुछ भी कर सकता है
वह अभागा है जिसे कोई पसंद नहीं करता मगर जिसे हर कोई पसंद करता है उससे बचो
मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी इच्छा का स्वामी व अपने अन्तः करण का दास हो
दूसरों का विश्वास वही जीतता है जिसे अपने पर विश्वास है
जो सर्वथा दोष रहित मित्र ढूंढता रहेगा वह मित्र रहित रह जाएगा
परिधि से केंद्र को जाने वाली रेखाएं बनो जो आपस में मिल जातीँ हैं सामानांतर रेखाएं मत बनो
जो कभी आपस में नहीं मिलती
सिर्फ दो से डरो –भगवन से ,और भगवान से न डरनेवाले इंसान से
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