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शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

Dharm & Darshan !Munshi Premchand !!

क्या कभी ऐसा नहीं होता कि कभी कभी हम अपनी जिंदगी के सारे सुख ,स्वप्न ,आकांक्षाएं किसी एक स्थिति के साथ जोड़ बैठते हैं और उस स्थिति तक पहुँचने के लिए मोहग्रस्त की तरह सारे संकट सारी यातनाएं झेलते चलते हैं ,स्थिति पर पहुंच कर एक दुखद विस्मय के साथ पाते हैं कि गंतव्य तक पहुँचने के उस प्रयत्न में ही सारे सुख स्वप्न झर गए ,सारा उल्लास और उत्साह समाप्त हो गया ,उपलब्ध को भोगने को अक्षमता ,उपलब्धि को निरर्थक बना देती है ,लक्ष्य प्राप्ति का वह सुख तो जिंदगी में कभी नहीं आता बस यही यातना यात्रा ही हमारी जिंदगी की वास्तविकता बन कर रह जाती है —मन्नू भंडारी
यदि आप दृढ़ता से काम करते जाएंगे तो अवश्य एक दिन आपको अभीष्ट सिद्धि का स्वर्ण स्तम्भ दिखाई देगा परन्तु धैर्य को कभी हाथ से न जाने दें ,दृढ़ता में बड़ी प्रबल शक्ति है। दृढ़ता पुरुष के सब गुणों का राजा है ,दृढ़ता वीरता का एक अंग है इसे कदापि अपने हाथ से न जाने देना ,तुम्हारी परीक्षएं होंगी ,तुम्हे लगातार निराशाओं का सामना करना होगा ,वे तुम्हारी प्रतिबंधक होंगी ऐसी स्थिति में दृढ़ता के अतिरिक्त कोई विश्वासपात्र पथ प्रदर्शक नहीं मिलेगा ,दरहता यदि सफल न भी हो सके संसार में अपना नाम छोड़ जाती है —मुंशी प्रेमचंद
वह दिन धन्य तथा याद रखने योग्य है जिस दिन एक आदमी यह अनुभव करता है,कि वह स्वयं ही अपना रक्षक तथा भक्षक है। स्वयं उसमे ही उसके समस्त दुखों तथा ज्ञान के अभाव के कारन मौजूद हैं और स्वयं उसके अपने ही भीतर शांति तथा प्रकाश के स्त्रोत विद्यमान हैं —लिली एलन
जिन वृक्षों की जड़ें गहरी होती हैं उन्हें बार बार सींचने की ज़रुरतनहीं होती वह ज़मीन से ही आर्द्रता खींच कर बढ़ते व फलते फूलते हैं —प्रेमचंद
त्रुटि तो प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है ,किन्तु उसपर दृढ केवल मूर्ख ही होते हैं —सिसरो
Do Today’s Duty —Fight Today’s temptation Do not weaken and distract yourself by looking forward to things ,you can not see and could not understand if you saw them—Charles Kingsley

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