मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

Dharm & Darshan ! Quotations,Bhajan !!

प्रतिभावान ही साधना भी कर सकते हैं। साधना प्रतिभा का विश्वास है अप्रतिभावान को लगता है मेरी साधना से कुछ बनाने का नहीं क्यों न जीवन के अवसरों का जो थोड़ा बहुत आरामदेह उपयोग हो सकता है ,कर ले ,कोई भी साधना जल्दी परिणाम नहीं दिखाती साधना की पहली सीढ़ी है केवल साधना के लिए साधना करना ,साधना सब्र मांगती है —हरिवंश राय बच्चन “प्रवास की डायरी”
प्यार की बगिया में मिठास और गंध उन वृक्षों और पौधों के फलों फूलों और पत्तियों की होती है जो ऋतु के अनुसार हौले हौले हँसते डोलते और गीली गीली भूमि पर अपने आप झरते रहते हैं —भगवती प्रसाद वाजपेयी “सपना बिक गया ”
मराठी कहावत –उडाला तर कावळा,बुडाला तर बेडूक
अगर आप सही हैं तो धीरज रखने में कोई नुक्सान नहीं है ,अगर आप गलत हैं अगर आप गलत हैं तो धीरज खो देने में खैरियत नहीं —महात्मा गांधी
A Man is nothing but his convictions
स्वर्णिम वाक्य —-
स्त्री नारी है ,नारी के साथ पत्नीत्व ,मातृत्व गृहिणीत्व और शील मर्यादा आदि कितने ही पदार्थों का मिश्रण है उन्ही सबने मिलकर नारी को इतना संजोया है उसे सुन्दर रूप दिया है ,उसे देवी का पद दिया जाता है वही नारी यदि सब विभूतियों को त्याग कर केवल नारी रह जाय न पत्नी रहे न माता रहे न गृहणी रहे न शील का विचार करे तो यह सुन्दर रूप निखर नहीं पाता
एक दीपक जल उठता है उससे केवल चारों और का अन्धकार हट जाता है इस नहीं उसकी शिखा से और भी कई दीपक प्रज्वलित हो उठते हैं उसी प्रकार जब कोई महा मानव अपने जीवन में सत्य को प्रत्यक्ष कर उसका प्रचार करते हैं तो उनके वचन और आचरण से मनुष्यों के मन के संदेह संशय का सारा अन्धकार दूर हो जाता है ,विश्वास के शुभ्र प्रकाश से चलने का पथ उद्भासित हो उठता है और युगों तक एक जीवन से दूसरे जीवन में संचारित हो कर उस सत्य का प्रकाश अमर हो रहता है –स्वामी विश्वाश्रयानन्द ,स्वामी विवेकानंद
सबसे बड़ा अपराध ठोकर लगने में नहीं अपितु उसके बाद न उठने में है विश्व में कोई असफलता नहीं जिसे सफलता में न बदल जा सके ,महान पुरुषों ने असफलता को सफलता की सीधी समझा था –स्वेट मॉर्टनअपने पूर्वजों के खोदे गए कुए का खरा पानी पीकर दूसरे के शुद्ध और मीठे जल का त्याग करने वाले बहुत से मूर्ख इस संसार में घूमते फिरते हैं —स्वामी विवेकानंद
To tell a lie is the last resort of a man whereas it is the first aid of a woman
अरे मन समझ समझ पग धरिये
अरे मन इस जग में नहीं अपना कोई
परछाई सो डरिये
दौलत दुनिया कुटुम कबीला
इनसो नेह न कबहूँन करिये
राम नाम सुख धाम जगत में
सुमिरन सो जग तरिये
ईश्वर तू है सबका स्वामी ,क्षमासिंधु और अंतर्यामी
महिमा तेरी अपरम्पार ,तुझसे गए हैं वेद भी हार
तूने सारा जगत बनाया ,अनुपम दृश्य हमें दिखलया
सूरज तारे चाँद बनाये ,जल थल अनल पवन प्रगटाये
न्यायी सत्य सिंधु सुख खान ,करूणानिधि तू है बलवान
दानी ज्ञानी घाट घाट वासी तू है निर्विकार अविनाशी
जीना मरना तेरे हाथ अधःपतन उन्नत तव साथ
यश अपयश का तू ही दाता रूप न तेरा जाना जाता
चींटी स हाथी तक सारे जितने जीव जंतु बेचारे
देकर सबको दान पानी। रखता तू उन पर निगरानी
राय को पर्वत कर देता ,पर्वत राय कर धर देता
नगरों को तू निर्जन करता ,बन में नगरी सिरजन करता
ब्रम्हादिक तव ध्यान लगते ,नारदादि मुनि तव गुण गाते
गाते गाते वे थक जाते तो भी पार न तेरा पाते
हे ईश्वर हे जगदाधार महिमा तेरी अपरम्पार
मेरी रख लीजे प्रभु लाज ,विनय यही करता हूँ आज
ईश्वर तू है सबका स्वामी ,क्षमा सिंधु और अंतर्यामी
अगर व्यक्ति की यह मान्यता हो कि चूँकि वह स्वयं अच्छा है अतः उसकी औलाद भी अच्छी होनी चाहिए साधारण रूप से यह मान्यता सही हो सकती है लेकिन हर मान्यता के साथ कुछ अपवाद तो जुड़े ही रहते हैं ,वैसे ही अगर व्यक्ति बुरा है तो उसकी औलाद बुरी हो सकती है यह ज़रूरी नहीं यहाँ भी उन अपवादों को अलग करके नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता है देखिये हिरण्यकश्चप जैसे दुष्ट वृत्ति के राक्षस के यहाँ भक्त शिरोमणि बालक प्रह्लाद का जन्म हुआ विपरीत इसके पुलस्त्य मुनि के वंश में रावण जैसे राक्षस का आविर्भाव हुआ। प्रभु इच्छा ही महानतम बलवती है ,हम साधारण जीव स्वनिर्मित मान्यता के आधार पर दुखी व सुखी होते रहते हैं
अरब ख़राब सो दृश्य हो,उदय अस्त सो राज
तुलसी आवे मरण जब कोऊ न आवत काज
जो युद्ध क्षेत्र से भागता है अपनी पराजय से भागता है ,उसके लिए कदम कदम पर युद्ध है और पराजय है जब तक कि वह जान न ले कि अब और भागना ठीक नहीं है टिक कर लड़ने न लगे —जीवन से भागना ?आगे और जीवन है जो रुक नहीं सकता उसका तो विस्तार समाप्त नहीं हो सकता —अज्ञेय शेखर —एक जीवनी
दूसरों को हम पर हंसने का मौका तब मिलता है जब हम अपनी आँखों में हलके हो जाएँ सुधारक और अग्रगामी संसार में मूर्खों द्वारा सदा लांछित न कर सकी और एक दिन अपने प्रति उनका यह सम्मान दूसरों के मस्तकों को अपने चरणो में झुका सका —कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर “झेपो मत रस लो
ध्येय की प्राप्ति उतनी दुष्कर नहीं होती जितनी उसकी रक्षा,प्राप्ति तो निरंतर प्रयत्न की अपेक्षा रखती है किन्तु रक्षा में संयम और समन्वय ,शील संतुलन की निष्ठां को सतत जागरूक रखना पड़ता है —भगवती प्रसाद बाजपेयी “विश्वास का बल”
यदि कठिनाइयाँ नहीं होतीं तो मनुष्य की न प्रगति होती न मानव चरित्र का उदघाटन और विकास हो पाता संसार में जड़ता छा जाती और मानवता विचारशून्य हो जाती
इसलिए बाधाओं से वास्ता पड़े तो मनुष्य को उनका स्वागत करना चाहिए क्योंकि इसका अर्थ यह है कि उसने किसी हद तक लापरवाही या मूर्खता बरती है और अब उससे छुटकारा पाने के लिए और बेहतर रास्ता अपनाने के लिए समस्त शक्ति और बुद्धि जुटाने का आव्हान किया गया है और यह कि उसके अंदर छिपी शक्तियां महानतर स्वतंत्रता और विस्तृत तर कर्म क्षेत्र के लिए बुलावा दे रही है —जेम्स एलन–” सफलता के सोपान ”
True humility is an absence of egoism –Krishnprem
Emotional singing of Chaitanya Dev and silent meditation of Buddha –No difference
Reason was the helper ,reason is the bar,what we need is a way to get the experience of it ,reach it ,enter into it,and live in it,If we can get that intellectual speculation and reasoing must necessarily fall into a very secondary place and even lose their reason for existence–Krishnaprem
Ah ! fill the cup : what boots it to repeat how time is slipping underneath our feet unborn tomorrow and dead .Yesterday Why fret about then if today be sweet –Umar Khayyam
The moving finger writes and having writ moves on :nor all they piety nor wit shall lure it back to cancel half aline ,nor all thy tears wash out word of it –Umar Kayyam
माता यस्य गृहे नास्ति भार्या च प्रिय वादिनी
अरण्यतें गंतव्य यथा रण्यम तथा ग्रैहम —पंचतंत्र
खूबसूरत औरत रत्न है लेकिन अच्छी औरत खजाना है —शेख सादी
To keep your secret is wisdom but to expect others to keep it is folly –O.W.Homes
He is the happiest be he king or peasant who finds peace in his home —गेटे
A picture is a poem without words —HoresPainting is silent poetry and poetry is speaking picture –सीमन डीज़
आकाश में उड़ने वाले पक्षी को भी अपने बसेरे की याद आती है –प्रेमचंद
घूस कानून को भी मोल ले लेती है –शेक्सपीयर
The first and worst of all frauds is to cheat ourselves —belly
What you are you do not see what you see is your shadow —Ravindrnath
Dilip Rai once criticised his Guru Shri Arbindo and wrote to shri Krishnaprem about this ,the letter replied”You write that you have sometimes criticised shri Arbindo You should not have of course he will not mind.He sees jewels in the otus and can smile at your criticism but you mustn’t do it Even in thought you must not critise him.It all springs from desire to have things ones own way .He is your Guru and first it is sheer ingratetude to criticise one.Who has shown you the light and secondly the Guru is in separable fromKrishna He is the one who has shown you the light and your whole life can be no repayment for such a gift even if you were spend the rest of this life with no further experiences at all you would be utterly wrong if you refused to give yourself to him as for as I know he does not ask for blind obedience from his disciples {at least as I gather from his letters }but one must nevercriticise even when one can not follow If one could understand everything One’s Guru said then there would not be a deal of need for Guru at all.
Ask nothing,Give Everything —Krishnaprem
It is Thakur who pulls the strings we move as he makes us move we dance as he makes us dance—Krishnaprem
यौवनं जीवितं चित्तं छाया लक्ष्मीत्व स्वामिता
चंचलानी षडेतानी ज्ञात्वा धर्मरतो भवेत
लक्ष्मीवन्तो न जानन्ति प्रायेण परवेदनाम
शेषे धराभर क्लान्ते शेते नारायणः सुखम
न देव विद्यते काष्ठे ,न पशन न मृण्मये
भावेषु विद्यते देवाः तस्माद्भावो हि कारणम
मनसैव कृतं पापं ,न शरीर कृतं कृतं
येनै वलिङ्गिता कांटा ,तैने वलिङ्गिता सुता
दधि मधुरं,मधु मधुरं
द्राक्षा मधुरं सुधापि मधुरं
तात्स्य तदेव हि मधुरं
यस्य मनो यत्र सलग्नम्

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