संसार की पीड़ा निवारण करने के लिए अनेक प्रयत्न चल रहे हैं उनमे से वास्तव में कितने
 सफल हुए ? पीड़ाएँ समाप्त न हो पाईं और यातनाएं भी काम नहीं हुईं आगे चलते जाना तेरे लिए
 आवश्यक है क्योंकि यही तेरा जीवन है
निवास,अन्न वस्त्र हो या न हो जीर्ण देह की गति कोई अन्य नहीं ,आशा एक पिशाचिनी की तरह 
मन को खुशहाल बनाने की चेष्टा में दुःख देती है,चलते जाना तेरे लिए आवश्यक है क्योंकि यही तेरा 
जीवन है
सारा जीवन विपत्तियों से भरा हुआ है ,सुख केवल दुःख को दुगना करता है। दुःख से विमुक्ति कैसे
 ,व किसे मिलती है ,चलते जाना तेरे लिए आवश्यक है ,क्योंकि यही तेरा जीवन है
अपने दुःख किसी से मत कहो ,,शरीर का मेल समाप्त करने के लिए तप की तरह दुखों को सहन 
करना होता है। भोग एक ऐसी शक्ति ने निर्धारित किये हुए हैं ,चलते जाना तेरे लिए आवश्यक है
 क्योंकि यही तेरा जीवन है
तू आगे बढ़ पृथ्वी बहुत विशाल है ,यह देह आज गिरेगा या कभी तो गिरेगा ही ,प्रपचों के पाश में फिर
 से मत पड़ ,चलते जाना तेरे लिए आवश्यक है ,क्योंकि यही तेरा जीवन है
तू कहाँ से आया है ,कहाँ जाने वाला है ,तुझे कुछ भी पता नहीं है ,यहाँ का सब कुछ जैसे का तैसा
 छोड़ कर ,तुझे किन्तु जाना ही है ,ऊपर आकाशगंगा में तू मुक्त रूप से विचरण कर ,तेरी गति क्या
 होगी इसका विचार तू मत कर
प्रभु इच्छा से एकरूप से फैले हुए इस संसार सागर में अद्वैत रूप से तू एक तरंग है ,उसीमे तू भंग होगा
 ,उसके निरंतर अस्तित्व की गति तेरे जाने पर तू विलीन किस प्रकार हो जायेगा ? वहां से वापस न आने
 के लिए।