खुदाबख्श मेरा क्या हाल होगा
अजब गफलत के फंदे में फंसा हूँ
अजब दुनिया के दलदल में धंसा हूँ
पुरज बीमो अलीमो दरदमंदम
परेशां रोजगारम् मुश्त मंदम
खुदाया रहमकुम बरहाल जारम्
गुनह्गारम मगर उमीद्वारम्
गुनाहों पर मेरे एक सर कलम फेर
दुआ मेरी हो ये मक़बूल बिन देर
तेरा अहसान हम पर हर नफ़स है
गुनाहगारों का तू फरियादरस है
मेरे दिल को बनादे मखज ने नूर
रहे उसमे सियाही शिर्क की दूर
मेरा हो मादने अनवार सीना
न हो उसमे निशाने बुग्जमीना
अता कर मुझको तौफीक इबादत
जुदा मुझसे न कर जिनहार रहमत
हो आसा गैब से हर काम मेरा
तेरा फ़ज़लो करम हो यार मेरा
रहे दिल में सदा तेरी मोहब्बत
पीता रहूँ मैं जामे वहदत
सरूर सहमदी हो मुझको हांसिल
रहे फरखुंद ओ शादा मेरे दिल
रहूँ आज़ाद मैं रंजो अलम से
रहूँ फारिग सदा मैं दुनिया के गम से
न कर बहरे शिकम मोहताज दोना
दे आपके रब्बान नेमत से मुझेना
नहीं मैं तालिबे आली मैं दौलत
मिले मुझको फकत गंजे किनायत
मेरा अंजाम हो बा खैर खूबी
दुआ हरदम है ये मशरक़ी की