मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

मेरी फ़ोटो
I love writing,and want people to read me ! I some times share good posts for readers.

शनिवार, 17 सितंबर 2016

Sher Behatreen ! { 15 }

साक़ी की तंगदिली से परशान हूँ मैं
अब ओक से पीता हूँ ताके अंदाज़ ना रहे
बेफ़नाए खुद मयस्सर नेस्त दीदारे ख़ुदा
मी फ़रोशद खेशरा अव्वल खरीदारी खुदा
अर्थात —स्वयं को मिटाये बगैर ईश्वर का दर्शन नहीं होता ईश्वर का खरीदार पहले स्वयं को बेच दे
अगर है देखना उसको
मिटा दे अपनी हस्ती को
कि तुझमे और उसमे पर्दा
हायल है तो बस ये है
ऐ शमा तुझपे ये रात भारी है जिस तरह
मैंने भी तमाम उम्र गुजारी है इस तरह
कह रहा है शोरे दरिया से समंदर का सुकून
जिसका जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो खामोश है —नातिक़ लखनवी
गुल हो कि गुंचे सब यह मुसाफिर चमन में है
कोई है दूर कोई है मंज़िल के सामने —हाफिज जौनपुरी
अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता हूँ ख़लवत में
कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने —साहिर लुधियानवी
फ़िदा करता रहा दिल को
हसीनो की अदाओं पर
मगर देखी न इस आईने में
अपनी अदा तूने —डॉ मोहम्मद इक़बाल
हो गयी दिल को तेरी याद से इक निस्बते ख़ास
अब तो शायद ही मयस्सर कभी तन्हाई हो —जिगर
हो न हो दिल को तेरे हुस्न से कुछ निस्बत है
जब उठा दर्द तो क्यों मैंने तुझे याद किया –जज़्बी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dharavahik crime thriller (173) Apradh !!

Nirmal immediately accompanied Suresh. They went to the house owner’s house which was away from the rented house. Nirmal politely described ...

Grandma Stories Detective Dora},Dharm & Darshan,Today's Tip !!