लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में
किसकी बानी है आलमे नपायदार में
कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें
इतनी जगह कहाँ है दिले दागदार में
किसकी बानी है आलमे नपायदार में
कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें
इतनी जगह कहाँ है दिले दागदार में
परेशानियां समेत कर सारे जहान की
जब कुछ न बन सका तो मेरा दिल बना दिया —काशिफ
जब कुछ न बन सका तो मेरा दिल बना दिया —काशिफ
लाख तूफां समेत कर या रब
किसलिए एक दिल बनाया गया —-ग़ालिब
किसलिए एक दिल बनाया गया —-ग़ालिब
इस तरह तै की हैं हमने मंज़िलें
कभी गिर पड़े,गिर कर उठे ,उठ कर चले
कभी गिर पड़े,गिर कर उठे ,उठ कर चले
मुझे आपसे कोई शिकवा न शिकायत है
जो कुछ भी हूँ मैं आज बस आपकी इनायत है
जो कुछ भी हूँ मैं आज बस आपकी इनायत है
न चले गुलशन की सख्त फरज़ाने
मेरे नसीब में लिखी गए हैं वीराने
जुनूँ का राज ज़माने को आज समझने
ये कैसे भेस बदलने लगे हैं दीवाने
ये इम्तहान मोहब्बत नहीं तो फिर क्या है
वफ़ा की राह में कांटे बिछाए दुनिया ने
इन्हे सम्हाल मेरे साक़िया निगाहों से
जो बिन पीये बहकने लगे हैं मस्ताने
लबों को सी लिया दुनिया के ख़ौफ़ से हमने
कहीं ये अश्क न कह दें ग़मों के अफ़साने
कज़ा के गोद में खुद आ के सो गए शबनम
सहर के बाद न शम्मा रही न परवाने —-शबनम देहलवी
मेरे नसीब में लिखी गए हैं वीराने
जुनूँ का राज ज़माने को आज समझने
ये कैसे भेस बदलने लगे हैं दीवाने
ये इम्तहान मोहब्बत नहीं तो फिर क्या है
वफ़ा की राह में कांटे बिछाए दुनिया ने
इन्हे सम्हाल मेरे साक़िया निगाहों से
जो बिन पीये बहकने लगे हैं मस्ताने
लबों को सी लिया दुनिया के ख़ौफ़ से हमने
कहीं ये अश्क न कह दें ग़मों के अफ़साने
कज़ा के गोद में खुद आ के सो गए शबनम
सहर के बाद न शम्मा रही न परवाने —-शबनम देहलवी
हरम की मंज़िलें हों या सनम खाने की राहें हों
खुदा मिलता नहीं जब तक मुक़ामे दिल नहीं मिलता
खुदा मिलता नहीं जब तक मुक़ामे दिल नहीं मिलता
मुसाफिर अपनी मंज़िल पर पहुँच कर चैन पाते हैं
वो मौजें सर पटकती हैं जिन्हे साहिल नहीं मिलता
वो मौजें सर पटकती हैं जिन्हे साहिल नहीं मिलता
मोहब्बत के मायने हैं कोई किसी पे शैदा हो
नज़र आशिक़ जिधर डालें उधर माशूक पैदा हो
नज़र आशिक़ जिधर डालें उधर माशूक पैदा हो
यहाँ दरख्तों के साये में धुप लगती है
चलो यहाँ से चलें उम्र भर के लिये
चलो यहाँ से चलें उम्र भर के लिये
ए चाँद तू क्यों इतराता है तस्बीर जमाली है उनकी
यूँ पीर जहाँ में लाखों हैं ,कुछ बात निराली है उनकी
कुछ ऐसा नशा छाया उस पर ,खो बैठा है अपनी सारी खुदी
मख़मूर निगाहों से आँखें जिसने भी मिला ली हैं उनकी
दरबारे मुक़द्दस में आँखें हमने तो झुकाली हैं लेकिन
झुकाते हैं यहाँ शाहों के भी सर वो शान जलाली है उनकी
दुनिया की निगाहों से बच कर और दूर ज़माने से हट कर
हमने तो तसव्वुर में अपने तस्वीर बना ली है उनकी
जब फ़र्दे अमल को देखेंगे ,बेख़ौफ़ वहां पर कह देंगे
उस दिन के लिए अपने मन में कुछ बात छुपा ली है उनकी
हर साल इकट्ठा हो कर जो मुर्शिद की सुनहरी कुटिया पर
करते हैं इबादत और ज़ियारत ,ये रीत निकाली है उनकी
उजड़ेगी नहीं हरगिज़ हरगिज़ अब गर्दिशे दौरां के हाथों
यूँ महफिले दिल को “बेकल”ने यादों से सजा ली है उनकी —बांकेलाल “बेकल”
यूँ पीर जहाँ में लाखों हैं ,कुछ बात निराली है उनकी
कुछ ऐसा नशा छाया उस पर ,खो बैठा है अपनी सारी खुदी
मख़मूर निगाहों से आँखें जिसने भी मिला ली हैं उनकी
दरबारे मुक़द्दस में आँखें हमने तो झुकाली हैं लेकिन
झुकाते हैं यहाँ शाहों के भी सर वो शान जलाली है उनकी
दुनिया की निगाहों से बच कर और दूर ज़माने से हट कर
हमने तो तसव्वुर में अपने तस्वीर बना ली है उनकी
जब फ़र्दे अमल को देखेंगे ,बेख़ौफ़ वहां पर कह देंगे
उस दिन के लिए अपने मन में कुछ बात छुपा ली है उनकी
हर साल इकट्ठा हो कर जो मुर्शिद की सुनहरी कुटिया पर
करते हैं इबादत और ज़ियारत ,ये रीत निकाली है उनकी
उजड़ेगी नहीं हरगिज़ हरगिज़ अब गर्दिशे दौरां के हाथों
यूँ महफिले दिल को “बेकल”ने यादों से सजा ली है उनकी —बांकेलाल “बेकल”
खुश वह दिन कि हुस्ने यार से जब अक्ल खीराः थी
यह सब महरूमियां हैं आज हम जितना समझते हैं
यह सब महरूमियां हैं आज हम जितना समझते हैं
यहाँ कोताहिये जौके अमल है खुद गिरफ्तारी
जहाँ बाजु सिमटते हैं वहीँ सय्याद होता है
जहाँ बाजु सिमटते हैं वहीँ सय्याद होता है
न सुलूक शहबर से न फरेब राहजन से
जहाँ मुतमईन हुआ है वही लूट गया राही
जहाँ मुतमईन हुआ है वही लूट गया राही
दिलम हरचंद मी गोयद
चुनीं बाशद चुनां बाशद
बले तक़दीर मी गोयद
न इं बाशद ,न आं बाशद —अर्थात —आदमी की यही खासियत है उसका दिल तो बहुत कुछ चाहता है वह चाहता है कि मैं यह भी हो जाऊं और वह भी हो जाऊं पर तक़दीर उसका साथ दे तब न !तक़दीर न यह होने देती है न वह होने देती है
चुनीं बाशद चुनां बाशद
बले तक़दीर मी गोयद
न इं बाशद ,न आं बाशद —अर्थात —आदमी की यही खासियत है उसका दिल तो बहुत कुछ चाहता है वह चाहता है कि मैं यह भी हो जाऊं और वह भी हो जाऊं पर तक़दीर उसका साथ दे तब न !तक़दीर न यह होने देती है न वह होने देती है
किसे पता कि उम्मीदों के रेत में हमने
न जाने कितने घरौंदे बना के तोड़े हैं
न जाने कितने घरौंदे बना के तोड़े हैं
चाहते हैं कब निशाँ अपना वो मिस्ले नक़्शे पा
जो कि मिट जाने को बैठे हैं फ़ना की राह पर
जो कि मिट जाने को बैठे हैं फ़ना की राह पर
रोई शबनम गुल हंसा गुंचा खिला मेरे लिये
जिससे जो कुछ हो सका उसने किया मेरे लिये—-उम्मीद अमेठवी
जिससे जो कुछ हो सका उसने किया मेरे लिये—-उम्मीद अमेठवी
कुछ सम्हल जाता अगर करवट बदल जाती मेरी
यह मुझे दुश्वार था उसके लिए मुश्किल न था —साक़िब लखनवी
यह मुझे दुश्वार था उसके लिए मुश्किल न था —साक़िब लखनवी
फूल चुनना भी अबस,सैरे बहरा भी अबस
दिल का दामन ही जो काँटों से बचाया न गया —जज़्बी
दिल का दामन ही जो काँटों से बचाया न गया —जज़्बी
उतरने वाले अभी तक न बाम से उतरे
तड़पने वाले तड़प कर फ़लक़ को छू आये —रियाज़ खैराबादी
तड़पने वाले तड़प कर फ़लक़ को छू आये —रियाज़ खैराबादी
साफ़ कह दीजिये वादा ही किया था किसने
उज्र क्या चाहिए झूठों को मुकरने के लिये –साक़िब लखनवी
उज्र क्या चाहिए झूठों को मुकरने के लिये –साक़िब लखनवी
ठुकराये जा रहे हैं खुद अपने दयार में
और इसलिए कि भटके न राहे वफ़ा से हम
जिन खयालात से हो जाती है वहशत दूनी
कुछ उन्ही से दिले दीवाना बहलते देखा —असर लखनवी
और इसलिए कि भटके न राहे वफ़ा से हम
जिन खयालात से हो जाती है वहशत दूनी
कुछ उन्ही से दिले दीवाना बहलते देखा —असर लखनवी
हमन तो इश्क मस्ताना ,हमन को होशियारी क्या
रहे आजाद हम जग में हमें दुनिया से यारी क्या ?
रहे आजाद हम जग में हमें दुनिया से यारी क्या ?
वक़्त ज्यूँ ज्यूँ रायगा {व्यर्थ} होता गया
जिंदगी को काम याद आने लगे
जिंदगी को काम याद आने लगे
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