कुछ रोज ये भी रंग रहा इंतज़ार का
,आँख उठ गई बस उधर देखते रहे —-असर लखनवी
,आँख उठ गई बस उधर देखते रहे —-असर लखनवी
बात कहने नहीं देते किसी दीवाने को
एक जाता है तो दूसरा आ जाता है समझाने को
एक जाता है तो दूसरा आ जाता है समझाने को
तुम पास नहीं हो तो अजब हाल है दिल का
यूँ जैसे मैं कुछ रख के कहीं भूल गई हूँ —अदा जाफरी
यूँ जैसे मैं कुछ रख के कहीं भूल गई हूँ —अदा जाफरी
ये गम बहुत है मेरी जिंदगी मिटाने को
उदास रह के मेरे ,दिल को और रंज न दो —साहिर
उदास रह के मेरे ,दिल को और रंज न दो —साहिर
ढूंढता ढूंढता खुद खो गया
जिसको ढूंढता था वह ही हो गया
सब जगह ढूंढा ,पाया पता तेरा नहीं
जब पता तेरा लगा ,तो फिर पता मेरा नहीं !
जिसको ढूंढता था वह ही हो गया
सब जगह ढूंढा ,पाया पता तेरा नहीं
जब पता तेरा लगा ,तो फिर पता मेरा नहीं !
हमने भी एक सुबह के खातिर
जलते बुझते रात गुजारी
दुःख की धुप में सुख के अक्सर
फलती है जीवन की क्यारी —नरेश कुमार शाद
जलते बुझते रात गुजारी
दुःख की धुप में सुख के अक्सर
फलती है जीवन की क्यारी —नरेश कुमार शाद
हम जान से बेज़ार रहा करते हैं ,
जब से दिल बेताब है दीवाना किसी का —अकबर
जब से दिल बेताब है दीवाना किसी का —अकबर
उनका जो फ़र्ज़ है ,वो एहले सियासत जाने
मेरा पैगाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुंचे —-जिगर
मेरा पैगाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुंचे —-जिगर
जुस्तजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने —-शहरयार
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने —-शहरयार
मसरूफ़े इंतज़ार रहा हूँ ,मैं सारी उम्र
और सारी उम्र बीत गई एक रात में —मजफ्फर वारसी
और सारी उम्र बीत गई एक रात में —मजफ्फर वारसी
भारी दिन तो है चंद रोज़ा,न चल यहाँ सर उठा उठा कर
कज़ा ने ऐसी हज़ारों सूरत ,बिगाड़ डाली बना बना कर
कज़ा ने ऐसी हज़ारों सूरत ,बिगाड़ डाली बना बना कर
जिन्दा रखना ,मार देना आपके हाथों में था
आपने कोई मगर कोशिश न की मेरे लिए —-हरिचंद अख्तर
आपने कोई मगर कोशिश न की मेरे लिए —-हरिचंद अख्तर
हुस्न चुराया नहीं जाता ,
फिर भी पहरे बिठाए जाते हैं —-ल न पांडे
फिर भी पहरे बिठाए जाते हैं —-ल न पांडे
अभी कमसिन हो नादां हो ,
कहीं खो दोगे दिल मेरा
तुम्हारे ही लिए रक्खा है
ले लेना जवां होकर —मजाज़ लखनवी
कहीं खो दोगे दिल मेरा
तुम्हारे ही लिए रक्खा है
ले लेना जवां होकर —मजाज़ लखनवी
आ गई रास अब तनहाइयाँ
अपने मन के आज कल राजा हैं हम —मुश्ताक अहमद ख़याल
अपने मन के आज कल राजा हैं हम —मुश्ताक अहमद ख़याल
न इंतज़ार न आहट न तमन्ना न उम्मीद
जिंदगी है कि यूँ ही बेहिश्त हुई जाती है —मीना कुमारी
जिंदगी है कि यूँ ही बेहिश्त हुई जाती है —मीना कुमारी
करता न मैं गुनाह ,तो तू बख्शता किसे
मेरे ही गुनाहों ने बनाया करीम तुझको
मेरे ही गुनाहों ने बनाया करीम तुझको
बूदे आदम ,नमूदे शबनम है
एक दो दम में फिर हवा है यह —मीर
अर्थात —मानव की हस्ती ओस की बूँद की तरह एक दो दम अस्तित्व में रह कर फिर हवा हो जाती है
एक दो दम में फिर हवा है यह —मीर
अर्थात —मानव की हस्ती ओस की बूँद की तरह एक दो दम अस्तित्व में रह कर फिर हवा हो जाती है
हस्ती अपनी हुबाब की सी है
यह नुमयश सुराब की सी है —-१ हुबाब : बलबला २ सुराब : मृग मरीचिका “मीर” ३ नुमयश : नुमाईश
यह नुमयश सुराब की सी है —-१ हुबाब : बलबला २ सुराब : मृग मरीचिका “मीर” ३ नुमयश : नुमाईश
मेरे रोने की हक़ीक़त जिसमे थी
एक मुद्दत तक वो कागज़ नाम रहा —मीर
एक मुद्दत तक वो कागज़ नाम रहा —मीर
अनजान तुम बने रहे ये और बात है
ऐसा तो क्या है तुमको हमारी खबर न हो —बेदिल अज़ीमाबादी
ऐसा तो क्या है तुमको हमारी खबर न हो —बेदिल अज़ीमाबादी
मैं उनकी याद में जिस वक़्त खो सा जाता हूँ
वो खुद भी बात करे तो बुरा लगता है मुझे —जांनिसार अख्तर
वो खुद भी बात करे तो बुरा लगता है मुझे —जांनिसार अख्तर
फलक के चाँद का क्या दिखे न दिखे
अपना नक़ाब हटा दो तो मेरी ईद हो जाये
अपना नक़ाब हटा दो तो मेरी ईद हो जाये
अव्वल अल्लाह नूर उपाया,कुदरत दे सब बन्दे
एक नूर ते सब जग उपज्या ,कौन भले कौन मंदे
एक नूर ते सब जग उपज्या ,कौन भले कौन मंदे
खुलता नहीं दिल बंद ही रहता है हमेशा
क्या जाने कि आ जाता है तू इसमें किधर से —ज़ौक़
क्या जाने कि आ जाता है तू इसमें किधर से —ज़ौक़
इश्क नाजुक मिजाज़ है बेहद
अक्ल का बोझ उठा नहीं सकता —अकबर
अक्ल का बोझ उठा नहीं सकता —अकबर
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