इशरते कतरा है दरिया में फना हो जाना
दर्द का हद से गुज़ारना है दवा हो जाना
दर्द का हद से गुज़ारना है दवा हो जाना
संसार सागर है ,जीवन है नैय्या
है पतवार साढ़े ,नए दो खिवैया
इन्हे मिल जाय यदि आशीष तुम्हारे
तूफानी सागर बनेगा तल्लैया—वैवाहिक निमंत्रण पत्र
है पतवार साढ़े ,नए दो खिवैया
इन्हे मिल जाय यदि आशीष तुम्हारे
तूफानी सागर बनेगा तल्लैया—वैवाहिक निमंत्रण पत्र
सैर की खूब फिरे,फूल चुने शाद रहे
बागबां जाते हैं हम ,गुलशन तेरा आबाद रहे
बागबां जाते हैं हम ,गुलशन तेरा आबाद रहे
अब इत्र भी मलो तो मोहब्बत की बू नहीं
वो दिन हवा हुए जब पसीना गुलाब था
वो दिन हवा हुए जब पसीना गुलाब था
बाकी है अब भी दिल में मोहब्बत की आरज़ू
क्यों कर कहूँ के कोई तमन्ना नहीं मुझेग़ज़ल ——
क्यों कर कहूँ के कोई तमन्ना नहीं मुझेग़ज़ल ——
ये सोज़े इश्क है इसमें धुँआ रहे न रहे
बाफूरे ज़ब्त में आहों फुगा रहे न रहे
तड़प रहा है अभी से तुम्हारी फ़ुर्क़त में
हमारा होके दिल नातबा रहे न रहे
मरीज़े गम की ये हसरत है तुम चले आओ
फिर इसके बाद कोई शादमा रहे न रहे
अभी तो धूम है हर सिम्त गुन्चाओ गुल की
ख़िज़ाँ के दौर में यह गुलसिताँ रहे या न रहे
मैं उनकी बज़्म में जाऊं भी किस तरह “बेकल ”
समझ के अजनबी वो मेहरबां रहे न रहे
बाफूरे ज़ब्त में आहों फुगा रहे न रहे
तड़प रहा है अभी से तुम्हारी फ़ुर्क़त में
हमारा होके दिल नातबा रहे न रहे
मरीज़े गम की ये हसरत है तुम चले आओ
फिर इसके बाद कोई शादमा रहे न रहे
अभी तो धूम है हर सिम्त गुन्चाओ गुल की
ख़िज़ाँ के दौर में यह गुलसिताँ रहे या न रहे
मैं उनकी बज़्म में जाऊं भी किस तरह “बेकल ”
समझ के अजनबी वो मेहरबां रहे न रहे
ग़ज़ल —-
हो गए जबकि अपने पराये
ऐसी दुनिया से हम बाज़ आये
उनसे टकरा गई क्या निगाहें
हर कदम पर कदम डगमगाए
इक क़यामत का आलम था हरसू
आप जब भी लंबे बाम आये
मंज़िले इरतिका ढूंढ़ लेंगे
काश ! रहबर न दामन बचाये
मौत भी जुज्बे हस्ती है “बेकल”
कोई मरकर तो उनपे दिखायेग़ज़ल —–
हो गए जबकि अपने पराये
ऐसी दुनिया से हम बाज़ आये
उनसे टकरा गई क्या निगाहें
हर कदम पर कदम डगमगाए
इक क़यामत का आलम था हरसू
आप जब भी लंबे बाम आये
मंज़िले इरतिका ढूंढ़ लेंगे
काश ! रहबर न दामन बचाये
मौत भी जुज्बे हस्ती है “बेकल”
कोई मरकर तो उनपे दिखायेग़ज़ल —–
सिर्फ उसके वास्ते है लफ्ज़ दीवाने का नाम
जो तेरी महफ़िल में आकर फिर न ले जाने का नाम
पी चूका हो जो तेरी मखमूर नज़रों की शराब
उसके लैब पर उम्र भर क्यूं आये पैमाने का नाम
आ गया तू दिल में जब से हो गयी हम सायगी
भूलता जाता हूँ मैं काबा औ बुतखाने का नाम
जब रिहाई औ गिरफ्तारी है तेरे हाथ में
कैदखाने से बदलते मेरे ग़मख़ाने का नाम
आपका बंदा हूँ तो मैं नाम लूंगा आपका
आदमी लेता है अपने जाने पहिचाने का नाम
शम्मा को जलना था सोज़े इश्क में जलती रही
मुफ्त में बदनाम सब करते हैं परवाने का नाम
होश वालो ये न समझो हूँ कोई खानाबदोश
घर मेरा “नैनी”में है “बेकल”है दीवाने का नाम
जो तेरी महफ़िल में आकर फिर न ले जाने का नाम
पी चूका हो जो तेरी मखमूर नज़रों की शराब
उसके लैब पर उम्र भर क्यूं आये पैमाने का नाम
आ गया तू दिल में जब से हो गयी हम सायगी
भूलता जाता हूँ मैं काबा औ बुतखाने का नाम
जब रिहाई औ गिरफ्तारी है तेरे हाथ में
कैदखाने से बदलते मेरे ग़मख़ाने का नाम
आपका बंदा हूँ तो मैं नाम लूंगा आपका
आदमी लेता है अपने जाने पहिचाने का नाम
शम्मा को जलना था सोज़े इश्क में जलती रही
मुफ्त में बदनाम सब करते हैं परवाने का नाम
होश वालो ये न समझो हूँ कोई खानाबदोश
घर मेरा “नैनी”में है “बेकल”है दीवाने का नाम
ज़िन्दगी में इश्क से बढ़कर मराहिल और हैं
इस ज़माने में तमन्ना और है दिल और है —वामिक जौनपुरी
इस ज़माने में तमन्ना और है दिल और है —वामिक जौनपुरी
किया जब से सिज़दा तेरे नक़्शे पा पर
खुदाई तो क्या,मैंने छोड़ा खुदा को
खुदाई तो क्या,मैंने छोड़ा खुदा को
ज़िन्दगी अपने आईने में तुझे अपना चेहरा नज़र नहीं आता
ज़ुल्म करने का तो हक़ है तुझको ,ज़ुल्म सहन मगर नहीं आता —नरेश कुमार शाद
ज़ुल्म करने का तो हक़ है तुझको ,ज़ुल्म सहन मगर नहीं आता —नरेश कुमार शाद
ग़ज़ल ——
मेरे जज़्बे दिल का असर देख लेना
तुम आओगे खुद ही इधर देख लेना
अभी सो रहे हो जगा देगी आकर
चलेगी नसीमे सहर देख लेना
तुम्हे देख कर चाँदनी खिल उठेगी
तुम्ही होगे रश्के कमर देख लेना
ज़मी पर कहीं चाँद उतरा हुआ है
खबर जाएगी चर्ख पर देख लेना
तुम्हे याद आएगी मेरी वफ़ा जब
तो हो जाओगे चश्मे तर देख लेना
जबीं को झुकाऊँगा जब आस्तां पर
तो सज़दे का मेरे असर देख लेना
तेरा नाम लेकर पुकारेगा “बेकल”
तो तू भी उसे इक नज़र देख लेना
तुम आओगे खुद ही इधर देख लेना
अभी सो रहे हो जगा देगी आकर
चलेगी नसीमे सहर देख लेना
तुम्हे देख कर चाँदनी खिल उठेगी
तुम्ही होगे रश्के कमर देख लेना
ज़मी पर कहीं चाँद उतरा हुआ है
खबर जाएगी चर्ख पर देख लेना
तुम्हे याद आएगी मेरी वफ़ा जब
तो हो जाओगे चश्मे तर देख लेना
जबीं को झुकाऊँगा जब आस्तां पर
तो सज़दे का मेरे असर देख लेना
तेरा नाम लेकर पुकारेगा “बेकल”
तो तू भी उसे इक नज़र देख लेना
खामोश ए दिल भरी महफ़िल में चिल्लाना नहीं अच्छा
अदब पहिला करीना है ,मुहब्बत के करीनो में
समझते थे जिन्हे हम आसमानो में ज़मीनो में
वह निकले मेरे ज़ुल्मत खानये दिल के मकीनो में
मुहब्बत के लिए दिल ढूंढ कोई टूटने वाला
वो मई है जिसे रखते हैं नाज़ुक आवगीनो में
अदब पहिला करीना है ,मुहब्बत के करीनो में
समझते थे जिन्हे हम आसमानो में ज़मीनो में
वह निकले मेरे ज़ुल्मत खानये दिल के मकीनो में
मुहब्बत के लिए दिल ढूंढ कोई टूटने वाला
वो मई है जिसे रखते हैं नाज़ुक आवगीनो में
राही कहीं राह कहीं राहबर कहीं
ऐसे भी कामयाब हुआ है सफर कहीं
ऐसे भी कामयाब हुआ है सफर कहीं
यों ज़िन्दगी गुजार रहा हूँ तेरे बगैर
जैसे कोई गुनाह किये जा रहा हूँ मैं —-जिगर
जैसे कोई गुनाह किये जा रहा हूँ मैं —-जिगर
तेरी ही याद में है ग़ाफ़िल ए खालिक खलक
पूछने गैर से हम अपनी खबर जाते हैं
पूछने गैर से हम अपनी खबर जाते हैं
जो उस गुल पै कहीं तबियत तेरी आई होती
बागे आलम की ना आँखों में समाई होती
बागे आलम की ना आँखों में समाई होती
दौलत मिली है इश्क की अब और क्या मिले
वह चीज़ मिल गई है ,जिससे खुदा मिले !
वह चीज़ मिल गई है ,जिससे खुदा मिले !
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