सुहबते ना जिंस से बदतर नहीं कोई अजाब
सुहबतें ना जिंस कहलाता है फैले का सवाब !
सुहबतें ना जिंस कहलाता है फैले का सवाब !
सूखते ही आंसुओं के नूर आँखों से गया
बुझ ही जाते हैं दिये जिस वक़्त सब रोगन जला!—मीर
बुझ ही जाते हैं दिये जिस वक़्त सब रोगन जला!—मीर
सब गए होश ओ सब्र तब ओ तवां
लेकिन ए दाग ए दिल से तू न गया !
लेकिन ए दाग ए दिल से तू न गया !
दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है
यह नगर सौ मरतबा लूटा गया !
यह नगर सौ मरतबा लूटा गया !
कभी ए हकीकत ए मुन्तज़र नज़र आ लिबास मिज़ाज़ में
कि हज़ारों सिजदे तड़प रहे हैं मेरी जबीने नयाज़ में —-इक़बाल
कि हज़ारों सिजदे तड़प रहे हैं मेरी जबीने नयाज़ में —-इक़बाल
जख्मों से कलेजे को भरदे
पामाल सुकूने दिल कर दे
ओ नाज़ भरी चितवन वाले
आ और मुझे बिस्मिल कर दे —बेदम
पामाल सुकूने दिल कर दे
ओ नाज़ भरी चितवन वाले
आ और मुझे बिस्मिल कर दे —बेदम
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