एक पतिंगे की मौत :
वह स्ट्रीट डॉग जिसे मैं डॉटी कहकर पुकारती थी और कोई पाँच छः वर्षों से हमारे पास आता रहा था और हम उसे खाना देते थे । डॉटी के बारे में मैं पहले ही डॉटी शीर्षक से लिख चुकी हूँ । उसकी मौत दस या ग्यारह ऑक्टोबर को हुई , यह अत्यंत दुखद था । उसी के बाद 16 October को हमलोग तीन चार दिन की यात्रा पर Chittorgarh गए यह यात्रा इस दुःख को कम करने में सहायक सिद्ध हुई । लौट कर आने के बाद एकाध सप्ताह में ही एक और डॉग completely black आने लगा और जल्दी ही उसने डॉटी की जगह ले ली । साथ ही एक नन्हा सा पतिंगा घर में उड़ता दिखाई दिया। कई बार दरवाज़ा खुलने पर भी वह बाहर उड़ कर जाता ही नहीं था यह हम दोनो पति पत्नी को आश्चर्य जनक लगा । वह प्रायः हमारे इर्द गिर्द ही मंडराया करता था । मैंने अपने पति से कहा यह Dotty है और पुनर्जन्म लेकर आ गया है और निकट रहना चाहता था । वह इतना निर्भीक था कि मैंने दो बार अपने हौले से हाथों में उसे पकड़ कर छोड़ दिया था । अब लगभग दो महीने हो चुके थे और हमें उसे देखते रहने की आदत हो गई थी । सुबह वॉकिंग पर जाने से पहले मेरे पति ने मच्छर मारने वाली अगरबत्ती जलाना चाही किंतु मैंने यह कह कर मना कर दिया कि पतिंगे को तकलीफ़ होगी । चार पाँच दिनों से घर में सफ़ेदी का काम चल रहा था, चूँकि पेंटर और उसका सहायक प्रातः साढ़े नौ बजे आ जाते थे , उनके आने से पूर्व हम दोनो पति पत्नी नहा कर नाश्ता कर चुके होते थे । एक बात बता दूँ हम दोनो को ही प्रातः उठकर मेथी पाउडर, हल्दी,और आँवला पाउडर ,एक एक चम्मच खाने की आदत है , Corona Period में इसकी सार्थकता अनुभव हुई । प्रायः मैं सुबह पहले खाती हूँ , और मेरे पति कुछ देर बाद , अतः मैं रसोई में तीनो डिब्बे खुले ही छोड़ देती हूँ । कल सुबह से रात तक मुझे पतिंगा नहीं दिखा तो मुझे लगा कि पेण्ट करने वाले इधर उधर घूम रहे हैं अतः कहीं छुप गया होगा । आज सुबह भी मैंने तीनो डिब्बे खोले । मेथी पाउडर ख़त्म हो रहा था अतः मैंने उस डिब्बे में झाँका तो दिल धक से रह गया पतिंगा उसमें था , वह मेरी उँगली पर चढ़ आया । हमने उसे एक स्वच्छ आरामदेह कपड़े पर रख दिया । मैंने अपने पति से कहा “ पूरे चौबीस घंटे बेचारा इस डिब्बे में क़ैद रह गया यद्यपि मेथी पाउडर उस डिब्बे में मात्र दो चम्मच था , जिसे मैंने फेंक दिया , फिर भी चौबीस घंटे उसने बाहर निकलने के अनवरत प्रयास किए होंगे । चूँकि वह चल रहा था , मैं हर्षित थी कि थोड़े आराम के बाद स्वस्थ होकर उड़ने लगेगा । हर आधे घंटे के बाद मैं देखती रही वह जीवित होने के संकेत देता रहा , किंतु शाम को मेरे पति ने कहा “ अब वह निश्चेष्ट सा है “ मैंने पूर्व की तरह उसे अपनी उँगली से छुआ की किंतु उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की ! मैंने गहरी साँस ली ।मेरे पति ने कहा अब अच्छी योनि में जन्म लेगा , उसकी यात्रा यहीं तक थी ।मुझे एक ही बात चोट पहुँचा रही थी , कि उसकी मृत्यु पूर्व के चौबीस घंटों के अनथक संघर्ष का उत्तरदायी कौन ? मैं ? मेरे पति ? नियति ? या उसकी मृत्यु का यही नियत मार्ग था ? ईश्वर मुझे क्षमा करें और उस आत्मा को अच्छी योनि में जन्म दे अथवा अपने चरणों में स्थान दे !
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