हमारी देवनागरी में जब नुक्ते
(नुक्ता मतलब dot जैसे 'क़' य्या 'फ़' यहां क और फ़ के नीचे डॉट लगी है इसे नुक्ता कहते है यह अरबी वर्णमाला का अंग है। )
.की कोई अवधारणा ही नहीं तो फिर देवनागरी में अरबी-फारसी शब्द लिखते हुए नुक्ता कत्तई नहीं लगाने की आवश्यकता है।
हिन्दी में अरबी-फारसी लिखवाने के मोह पाले संकर जुबान उर्दू वाले अपनी इस शौक की दूकान को बन्द करें या तो लेफ्ट टू राइट लिखते हुए आपस में ही अढ़ते-पढ़ते-लिखते रहें।
हिन्दी ने अरबी-फारसी के सही उच्चारण का कोई ठेका नहीं उठाया और भला क्यों उठाये?
अरबी-फारसी के शब्दों के दुरुस्त उच्चारण के नाम पर देवनागिरी में नुक्ते का अतिक्रमण हिन्दी को बिगाड़ने की एक साजिश है- भाषा जेहाद है।
*ज़हर को जहर* ही लिखिए- जो उच्चारण और भाषा ज्ञान बघारे उसे विष पी कर मर जाने दीजिए।
सौजन्य :अवनीश पी. एन. शर्मा
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