मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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रविवार, 20 मार्च 2016

Muniya !!

मुनिया ------

कल तक थी मैं इत्तीसी ,दुलारी मुनिया
उछल कूद मचाती गुड़िया
जाने कब बदल कर रह गई
इर्द गिर्द की सारी दुनिया
छोड़ गए बरसों पहले ही प्यारे अन्ना
सह गई मैं मम्मी के बूते वो आघात
लगता था मम्मी तो है,
वो ही पार लगाएगी जीवन की नैया
मम्मी से बड़ा सहारा था
वजनी था आशीष भरा उसका हाथ
मिलता था मुझको उससे ही
विश्वास - आत्मविश्वास
लेकिन उसके जाने पर ही
पता चला,मैं दीदी हूँ ,
पत्नी हूँ ,माँ हूँ , और दादी भी हूँ
नहीं रही अब मैं ,कल तक थी
जो दुलारी मुनिया !


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