मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

Jeevan Mrityu !!

जीवन मृत्यु ----
मात पिता ,पुत्र पुत्री ,भाई और बहना,
जुटतेहैं सब एक ठौर एक ही अंगना
स्नेहप्रेम विश्वास बाँटते बीते जाते हैं दिन
बीतीजाती हैं रैना
स्वप्नोंजैसे सुन्दर बचपन,स्वप्नों से सुन्दर यौवन
ज्योंसितारों पर बादलों का हो बिछौना
पलक झपकते बीते ज्यों स्वप्नकोई सलोना
दर्पणमें दिखने लगताहै अब ठहराहुआ बुढ़ापा
जीर्णशीर्ण जरावस्था का हर एक कोना कोना
तब ,अलग अलग मार्गोंसे आती सबसेबड़ी सच्चाई
जिसेसभी जानते हैं हम मृत्यु नाम से,
जीवनके रंगमंच का पटाक्षेप परदे का गिरना,
उसकेबाद शून्य में सबका बारी बारीविलीन हो जाना
जीवितसे निर्जीव बन ,तस्वीरों में सिमट जाना,
खट्टीमीठी मधुर स्मृतिबनना,
कभी होठों का स्मित बनना  
कभी अश्रु की अविरल धारासे
 अपनों की आँखों को धुँधलाना
जीवनऔर मृत्यु  के कठोर सत्यसे,
अवगतहमें कराना,
रंगमचके सभी कलाकारोंको ,
एक एक कर ,नैपथ्यमें है जाना!!






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