मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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गुरुवार, 9 जून 2016

Eishwar !!

ईश्वर ----

हम आश्चर्यचकित हुए थे उस दिन जब,
जोड़ बाकी और गुणा भाग को
करता था "कैलकुलेटर"
अब आश्चर्य नहीं होता है
किसी भी "आविष्कार"पर
कागज़ ,कलम,दवात फ़िज़ूल है
टाइपिंग करे कम्प्यूटर प्रिंटर
कॉमिक,नावेल,कथा,कहानी,
मस्तिष्क में छवियों का अंकन
अपने शब्दों में उनका चित्रण
लगता था मनमोहन
किताबों को सारी खा गया "गूगल"
और छोटा सा "किंडल"
टॉर्च,घडी कैमरा और अल्बम
लैंड लाइन फ़ोन भी हो गया गायब
पंचांग,चौघड़िया,कैलेंडर,अखबार,छोडो
डिक्शनरी,इनसाइक्लोपीडिया भी गायब
हाथ के छोटे से "स्मार्ट फोन" में देखें
हफ्ते भर के दुनिया के मौसम,
करें खरीदी ,अमेज़न पर,बेचें "ओ एल एक्स पर
बैंकिंग और रिजर्वेशन सारे, बिजली पानी बिल भर 
कहाँ आप हैं ,कहाँ है जाना
"डिवाइस " से सारे मिलें मार्गदर्शन
आई एम ओ,आई फोन,आई पैड,पर ,
देखें प्रियजन,बात करें और करें "मनोरंजन"
वो दिन भी अब दूर नहीं है
"ट्रांसमिट" हो जाएँ हम तुम ,लगे ना जिसमे पलभर
जहाँ चाहें वहीँ जा पहुंचें
बिना किसी हवाई सफर ,बिना किसी "हैलीकॉप्टर"
कितना बुद्धिमान है मानव,जा पहुंचा मंगल पर
क्या कभी देख पाएगा वो ,जीते जी ही "ईश्वर "  ??????

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