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गुरुवार, 2 जून 2016

Vasudhaiv Kutumbakam !!

 वसुधैव कुटुंबकम ---

एक  ओर से समेटो ,
तो दूसरी ओर से से उघड जाते हैं ,
जितना बचाने की करें कोशिश ,
इधर से, उधर से, जाने किधर किधर से ,
यहाँ से ,वहां से ,दरक जाते हैं ,
जाने किसने कहा था "वसुधैव कुटुम्बकम "
यहाँ तो एक ही कुटुंब में ,
कई कई जहान बस जाते हैं ,
बहुत मनभावन है ,बड़ा मनमोहन है
ये फेस बुक और व्हाट्सएप का मंच
व्यस्तता, महत्वकांक्षा और प्रतियोगिता के इस दौर में ,
जिन्हे कभी ना देखा था बचपन से ,
वो दूर दराज रहने वाले बिलकुल अपने ,
चाचा,मामा,मौसा ,ताऊ,
चचेरी ,ममेरी मौसेरी,बहने,भतीजियां,सहेलियां
दुनिया के कोने कोने से अनजाने,अंजानियाँ
एकदम से नज़दीक आ गए हैं ,
उनके दिन प्रतिदिन जीवन की घटनाएं ,
"हॉलीडेज""बर्थडेज""एनिवर्सरी"
"केक""बुके" "इ ग्रीटिंग्स "की बधाइयां,
सच में किसी ने सही कहा था ,
वसुधैव कुटुंबकम !!! 

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