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गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

Halahal Se : Pani !!

पानी—————-

पानी में मिलादो पानी,
बन जाएगा पानी,
एक रंग है रूप अनेक,
पानी का रंग है पानी।

हर्षातिरेक में भी बहता है,
सबकी आँखों से पानी,
अपमान ,उपेक्षा दुःख हार में,
डबडबा जाता है पानी।

ईमानदार और सत्यनिष्ठ के,
चेहरे पे चमकता है पानी,
दुष्ट भ्रष्ट मक्कार जनों का,
मर जाता है सब पानी।

बरसातों में बशर लीलता,
कई शहर के शहर लीलता,
चारों ओर दिखाई देता है,
बस ,पानी ही पानी।
                                                            
कभी नहीं सोचा था मैंने,
बिकने लग जाएगा पानी,
प्रकृति ने तो मुफ्त दिया था,
क्रय विक्रय होता पानी।

इसे बचाओ संचित कर लो,
भूगर्भ में घट रहा पानी,
गर्मी में हैं सब चिल्लाते ,
हाय पानी,हाय पानी।

एक घड़ा भरने नारी को,
मीलों दूर चलाता पानी,
पानी को लाने में उसका,
जाने बहता कितना पानी।

लट से टपके बूंद बूंद कर,
तृषा तृप्त करता पानी,
चातक की खुली चोंच में मानो,
टपके स्वाति का पानी।

आवश्यकता और महत्ता,
कह गए बड़े बड़े ध्यानी,
पानी के बिन सूना मानस,
मोती,चून,रहीम की बानी।

पानी के बिन  जीवन सूना,
अकल्पनीय सी लगे कहानी,
इस शरीर के पंच तत्व  में,
महत्वपूर्ण एक है पानी।

लग जाए जब आग कहीं पर,
तेल कूएं या घर जंगल में,
पानी की सब बाट  जोहते,
काबू करता है पानी।

पानी की है अनंत कहानी,
अनंत रहे धरा पर पानी,
लक्ष्मी रूप समझ कर इसको,
करो प्रणाम ,बचाओ पानी!








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