इब्तिदा वो थी की जीना भी था मुहाल,
इन्तहा ये है के अब मरना भी मुश्किल हो गया !—जिगर मुरादाबादी—
इन्तहा ये है के अब मरना भी मुश्किल हो गया !—जिगर मुरादाबादी—
करार अगर दे न सके बेकरार ही कर दे,
ख़ुशी मुहाल सही अश्क बार ही कर दे,
मेरे चमन के नसीबों में गर बहार नहीं,
तो इसको हदिया – ए – बरको शरार ही कर दे !
ख़ुशी मुहाल सही अश्क बार ही कर दे,
मेरे चमन के नसीबों में गर बहार नहीं,
तो इसको हदिया – ए – बरको शरार ही कर दे !
जाने क्यों इन दिनों मेरे दिल से ,
दूर सब्रो करार रहता है,
आप इतने करीब है फिर भी,
आप का इंतज़ार रहता है!—महेशचंद्र नक्श—
दूर सब्रो करार रहता है,
आप इतने करीब है फिर भी,
आप का इंतज़ार रहता है!—महेशचंद्र नक्श—
एक दिल का दर्द है रहा जिंदगी के साथ,
एक दिल का चैन था सदा ढूँढ ता रहा ”
एक दिल का चैन था सदा ढूँढ ता रहा ”
सफए अव्वल से फकत एक ही मयख्वार उठा
कितनी सूनसान है लेकिन तेरी मंजिल साकी !
कितनी सूनसान है लेकिन तेरी मंजिल साकी !
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