मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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सोमवार, 24 अक्टूबर 2016

Late Shri Purushottam Govind Perlekar's Sankalan !! {185}

सुबह कहते हैं जिसे शाम का अफ़साना है!
दिल की ही बदौलत रंज भी हैं,
दिल की ही बदौलत राहत भी है,
यह दुनिया जिसको कहते हैं,
यह दोजख भी और ज़न्नत भी!
किस्मत की खूबी देखिये टूटी कहाँ कमांड,
जब की लबे बाम दो हाथ रह गया !
गिरते हैं शाह स्वर ही मैदाने जंग में,
वह तिफल क्या करे जो घुटनों के बल चले !
साकी शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर,
या वह जगह बता जहाँ पर खुदा नहीं!
खुदी को कर बुलंद इतना
अगर कुछ मरतबा चाहे
के दाना खाक में मिल कर
गुले गुलज़ार होता है!
तेरे करम से बेनियाज़ कौन सी शै मिली नहीं,
झोली ही मेरी तंग है तेरे यहाँ कमी नहीं!
दिया जलता तो है मगर किसी का दिल भी जलाता है,
चले आओ जहाँ तक रोशनी मालूम होती है!




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