मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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सोमवार, 24 अक्टूबर 2016

Late Shri Purushottam Govind Perlekar's Sankalan !! {183}

दिल ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात दिन
 बैठे  रहे तसव्वुरे जाना  किये हुए !

नेरंगियों से यार की हैरान हो जियो
 हर रंग में उसी को नमूदार देखना !

कोई जां हो,हरम हो या सनम खाना हो,
 नक़्शे कदम यार पे सजदा करना है!

अब याद आई मेरी आरामे जां इस नामुरादी में,
के कफ़न देना हम भूले थे असबाबे शादी में!

दुनिया में जो मज़े हैं हरगिज ये कम न होंगे,
चर्चे यही रहेंगे,अफ़सोस हम न होंगे!

जिंदगी क्या है,अनासिर में जुहूरे तरतीब,
मौत क्या है इनही अजजा का परेशां होना!

कारसज़े मां   बाफ़िक्रे कारे मां   ,
फ़िक्र मां दरकार मां आजार मां !

 अर्थात—जिसने मुझे बनाया है,जो मेरा उत्पन्न करने वाला है,वह स्वयं मेरी चिंता रखता है,आवश्यकता पड़ने पर ,या रोग या कष्ट आने पर वह उसका उपाय करता है,फिर मुझे फ़िक्र करके अपने को अशांत बनाने की क्या जरूरत है!

“हरचे  बादाबाद ” 

अर्थात—जो होना है सो ह़ोएगा 

हिम्मते मर्दा ,मददे खुदा!

वस्ल में हिज्र का गम,हिज्र में वस्ल की खुशी,
कौन कहता है जुदाई से विसाल अच्छा है!

शिकवा न यार से न शिकायत रकीब से,
जो कुछ हुआ खुदा से या नसीब से !

जिन्हें है इश्क सादिक वह कहाँ फ़रियाद करते हैं,
लबों पर मोहर खामोशी दिलों में याद करते हैं,
फिराके यार में दिन जिंदगी में अपनी भरते हैं,
सिसकते हैं पड़े आशिक न जीते हैं न मरते हैं!

निगाहें डाल कर छुपा लेते हैं चुपके से,
नज़र महबूब की देखो,जफा भी है वफ़ा भी है!




कैसे कह दूँ  के मुलाकात नहीं  होती है, 
मिलते रहते हैं मगर बात नहीं होती है!

तेरा ही नाम लेकर खिलते हैं गुल चमन में,
तारों में चाँद बनकर तू मुस्कुरा रहा है!
तौबा से कोई कहदे आये न मैकदे में ,
जादू  भरी  नज़र से साकी पिला रहा है!

जिन्हें है इश्क सादिक वह कहाँ फ़रियाद करते हैं,
लबों पे मुहर ख़ामोशी ,दिलों में याद करते हैं,
फिराके यार में दिन जिंदगी में अपनी भरते हैं,
सिसकते हैं पड़े आशिक न जीते हैं न मरते हैं!

न पा सकते जिसे पाबन्द रहकर कैदे  जाए हस्ती में,
सो हमने बेनिशां होकर तुझे जो बेनिशां पाया !

उन्ही की किरण से जीवन की राह पाई है,
वरना भटक चुके यां लाखों मशाल वाले!

हम रोने पे आये तो दरिया बहा दें ,
शबनम क तरह से हमें रोना नहीं आता “जौक “

हश्र के दिन वो गुनाहगार न बक्शा जाए ,
जिसने देखा तेरी आँखों का पशेमां होना!”जिगर मुरादाबादी 

तेरे ज़िक्र ने तेरे फ़िक्र ने तेरी याद ने वो मज़ा दिया ,
की जहाँ मिला कोई नक्शेपा वहीँ हमने सर को झुक दिया!”बहजाद”

बड़े शौको तवज्जो से सुना दिल की धड़कनों को,
मैं ये समझा शायद आपने आवाज़ दी होगी!”महिरुल”

न थी हाल की जब हमें अपनी खबर, 
रहे देखते औरों के ऐबे हुनर,
पड़ी अपनी बुराइयों पे जो नज़र,
तो निगाह में कोई बुरा न रहा!”ज़फर” 

जिंदगी का साज़ भी क्या साज़ है,
बज रहा है और बेआवाज़ है!

कही से ढूंढ़ के लादे हमें भी गुलेतर ,
वो जिंदगी जो गुजर जाए मुस्कुराने में!”आसी”

जिसको तुम भूल गए याद करे कौन उसे,
जिसको तुम याद हो वो और  याद करे!

शायद मुझे निकाल के पछता रहे हैं आप,
महफ़िल में इस ख़याल से फिर आ गया हूँ मैं!



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