मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

मेरी फ़ोटो
I love writing,and want people to read me ! I some times share good posts for readers.

बुधवार, 26 अक्टूबर 2016

Wajood Se : Seepiyaan,Baadal !!

सीपियाँ————

सीपियों सी दो सुन्दर आँखें,

इनमे छुपे दो चमकते मोती,
चकाचौंध कर देते हैं,
अमृत भरे अनुपम ये मोती,
घनेरी पलकें जब झुक जाएँ,
तब घिर आए सांझ घनेरी,
और जो उठ जाएं वो पलकें,
तो ऊषा की छाए लाली,
जब इनमे उदासी छा जाए,
चारों ओर उदासी दिखती,
और जो ये आंसू टपकाएं 
सारी खुशियां, बह बह जाती,
जिज्ञासा विस्मय दर्शाएं 
विस्फारित से ये दो मोती,
अभिव्यक्ति प्रेम हर्ष की भी,
इनमे प्रज्वल स्नेह की ज्योति!

शब्द अर्थ–विस्फारित–बड़ी बड़ी ,जिज्ञासा–जानने की इच्छा 


बादल——————–


श्वेत स्वच्छ कितने धवल,

कितने सुन्दर और उज्जवल,
उड़ाते फिरते हो कहाँ कहाँ तुम 
हे रेशम से प्यारे बादल।

रूप नए धरते हो पल-पल,

कभी भटकते रहो अकेले,
कभी सहित दिखते दल-बल,
कृषकों को बन के संबल।

घर नहीं तुम्हारा क्या कोई,

कभी नहीं रहते अचल,
लगते ही कितने मोहक,
शीतल एवं दुग्ध धवल।

सावन में हो जाते श्याम,

दिखते हो श्यामल श्यामल,
घनघोर घटा सा रूप तुम्हारा,
होता है किंचित निर्मल,
प्यास बुझाते वसुंधरा की,
धन्य हुआ है जगत सकल!

सूरज—————–


इस वसुधा के दिव्य जनक,

तुम ही तो हो निर्देशक,
दिनचर्या के तुम हो स्त्रोत,
तुम ही सबके पथ प्रदर्शक।

इस सृष्टि के संचालक,

जीव धारियों के पालक,
दसों दिशाओं के दिग्दर्शक,
हरीतिमा के तुम संस्थापक।

ग्रीष्म में बरसते पावक,

धरती की बन जाते दाहक,
क्यों क्रोधित हो जाते हो तुम,
तुम तो हो धरती के  रक्षक।

सब जग चितित हो जाता है,

जब लग जता तुम्हे ग्रहण,
किन्तु ग्रहण के बाद अलौकिक,
लगते हो कितने मोहक।

काल गणित के तुम मानक,

सफलता के तुम हो द्योतक,
करोड़ों प्रकाश वर्ष हो दूर,
पर दर्शनीय तुम ,हम दर्शक!









कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dharavahik upanyas Bhoot-Adbhut!(86)

The nearby village people also gathered around because the sounds of Raja’s neighing was sharp but when all of them looked at the haveli it ...

Grandma Stories Detective Dora},Dharm & Darshan,Today's Tip !!