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मंगलवार, 25 अक्टूबर 2016

Wajood Se : Sharafat,Sharaara !!



शराफत———————–

कहाँ थे हम कहाँ आ गए हैं,
जाने किस ओर चले जा रहे हैं,
क्या थे हम क्या हो गए हैं,
जाने क्या बने जा रहे हैं
बदल गई इबारतें सारी ,
ढह गई इमारतें सारी
अच्छा बुरा सही गलत,
सब घुल मिल कर एक हो गया,
इंसान अब नहीं लगता इंसान सा,
मर गई इंसानियत सारी ,
सयानेपन की न पूछ ए दोस्त,
यहाँ हर एक है दूजे से सयाना ज्यादा,
शरीफों की चारों और दिखती है भीड़,
लेकिन काफूर हो गईं शराफतें सारी।

     शब्द-अर्थ—काफूर–गायब,इबारत–लिखी हुई तहरीर

शरारा —————————

दूर बहुत दूर हो तो,
लुभाता है शरारा ,
दामन से लिपट जाए तो,
जलाता है शरारा,
ख़ुशी जब हो तो,
जगमगाता है शरारा,
गुस्से में आँखें ,
उगलतीं हैं शरारा,
ग़मों की आग लेकिन,
बुझा देती है शरारा ,
हो जश्न का माहौल तो,
आतिशबाजी का शरारा ,
अपनी पर आ जाए तो,
तबाही है शरारा,
कितने रूप कितने रंग हैं,
बस एक छोट सा है शरारा !

शब्द अर्थ—शरारा –चिंगारी,

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