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बुधवार, 9 नवंबर 2016

Late Shri Purushottam Govind Perlekar's Sankalan !! {149}

मायूस न हो हार के तकदीर की बाज़ी,
प्यार है वो गम ,जिसमे भगवान् हो राजी!
आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक,
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक,
हमने माना के तगाफुल न करोगे लेकिन,
ख़ाक हो जाएंगे हम तुमको खबर होने तक!
उल्फत का जाम पीकर मखमूर हो गए हम,
उसके नशे में बेखुद और चूर हो गए हम,
नाज़िर थे जब नज़र थी,मंज़ूर पर मगर अब,
मंज़ूर की नज़र में मंज़ूर हो गए हम,
जाहिर थे हम तो हमसे रहता था खुदा पिनहा,
उसको अयां किया जब मशहूर हो गए हम!
ये हुस्न जब बेनकाब होता है,
आप अपना जवाब होता है!
ऐब ये है के करो ऐब,हुनर दिखलाओ,
वरना यां ऐब तो सब फ़र्दोबिशर करते हैं!
निगाहे लुत्फे करम जब वो बेनियाज़ करे,
नियाज़मंद न क्यूँ फिर आज़ीज़ी पे नाज़ करें!
लुत्फे मंजिल क्या जो कायम रह गए होशो हवास,
लुत्फ़ पाने में नहीं बल्कि खो जाने में है!
मोहब्बत में तमन्ना ए करम क्या ?
सितम में जब करम है ,तो करम क्या?
नफ्स नफ्स में तेरी याद जब शरीक न हो,
वो जिंदगी मयस्सर न हो लम्हा भर के लिए!



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