मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

मेरी फ़ोटो
I love writing,and want people to read me ! I some times share good posts for readers.

शुक्रवार, 31 मार्च 2017

Daur-E-Waqt !!

दौर - ए -वक़्त ----

फुर्र से उड़ जाता है नील गगन में 
नादान मासूम सा बचपन ,
जाने कितनी नटखट शरारतें,
वो संगी वो साथी,वो नए नए खुद ईजाद किये खेल 
उछल कूद,धमा चौकड़ी,
कट्टी बट्टी ,रूठने मनाने की 
सुबह शाम की दैन्यदिनी 
अल्हड उद्दाम निर्बंध नदी सी युवावस्था 
महत्वाकांक्षाओं  का सुदूर तक फैला क्षितिज 
उसके बाद कोल्हू के बैल सा 
कर्तव्यों की घाणी  में गोल गोल घूमता 
वैवाहिक जीवन का चक्र 
और फिर आकर ठिठक ठहर जाने वाला बुढ़ापा 
साथ में ले आता है ,नए नए मेहमान 
तकलीफों बीमारियों के स्वाभाविक रूप से 
बनाए रखता है व्यस्त आपको 
उनसे निपटने निपटाने  में 
लेकिन कभी लौटता नहीं है 
वक़्त ,गुज़र जाने के बाद 
गल्तियां सुधारी नहीं जा सकतीं 
एक बार कीं जाने के बाद 
एक सुनहरा मार्ग सदैव होता है सामने 
गल्तियों से सबक लेने और 
खुद को पल पल सुधारने का !! 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dharavahik upanyas Bhoot-Adbhut!(104)

When Samantha reached I.K. After ten years she found no change. She collected her suitcase from the luggage belt and after fulfilling all pa...

Grandma Stories Detective Dora},Dharm & Darshan,Today's Tip !!