मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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सोमवार, 5 जून 2017

Suraj Chachu---8

सूरज चाचू ----8

47 degree जा पहुंचे,और कहाँ अब जाते हो
सर पर तपते ही रहते हो,अब  लगता है घर में घुस आते हो
प्रचंड क्रोध से क्रोधित होकर ज्वालामुखी बन जाते हो
फुंफकारते आग भरी लू डायनोसोर से दिखते हो
नदी नाले तो सूखे सारे अब शरीर का पानी सुखाते हो
पहले पापड सिंक जाते थे ,अब ऑमलेट बनवाते हो
इतनी सारी गर्मी तुम ,हमको ही क्यों दिखलाते  हो
माफ़ करो अब सूरज चाचू ,क्यों रहम नहीं कुछ खाते हो
पूजा करते हम सभी तुम्हारी तुम सृष्टि के नायक हो
जल चढ़ाते हम  मंत्रोच्चार सह, शीतलता तनिक न पाते हो ?
योग में "सूर्य नमस्कार" में सर्वोच्च स्थान तुम पाते हो
हम सब निरीह नादान बालक हैं,"कृपा" क्यों भूले जाते हो ?
नादानी में "मानव"ने ही कर दिया असंतुलन पृथ्वी का
काट काट वृक्षों को बंजर,सीमेंट के जंगलों से पाट दिया
अक्षम्य अपराधी है मानव,फिर भी क्षमा अपेक्षा करते हैं
हल्की सी Smile दे दो अब,कितने प्यारे लगते हो ?

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