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बुधवार, 26 जुलाई 2017

Dharm & Darshan !! Naagchandreshwar !!

यहां रहता है 1000 साल का नाग, साल में एक दिन खुलता है ये मंदिर
इंदौर।भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक है, उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का।
इस विश्व प्रसिद्ध मंदिर की खास बात यह है कि इसके पट साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी
के दिन ही दर्शन के लिए सिर्फ 24 घंटे के लिए खुलते हैं। इस बार नागपंचमी 28 जुलाई को है।
 ऐसे में 27 जुलाई की रात 12 बजे नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पट खुलेंगे और 28 जुलाई की रात 12 बजे
तक दर्शन होंगे। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मंदिर में स्वयं 1000 साल से भी ज्यादा आयु के नागदेव मौजूद रहते हैं।
रात 12 बजे खुलेंगे पट

नागपंचमी महापर्व पर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित प्राचीन श्री नागचंद्रेश्वर
महादेव के गुरुवार-शुक्रवार की मध्य रात 12.00 बजे पट खुलेंगे और परंपरा अनुसार पंचायती महानिर्वाणी
 अखाड़े के महंत भगवान नागचंद्रेश्वर महादेव का प्रथम पूजन करेंगे। पूजन के बाद मंदिर के पट आम
 श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे।
नाग आसन पर शिव-पार्वती के दर्शन
नागचंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालु 11वीं शताब्दी की अद्भुत प्रतिमा के दर्शन करेंगे।
इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। महानिर्वाणी अखाड़े के प्रतिनिधि
महंत रामेश्वर दास महाराज ने बताया नागपंचमी पर इस प्रतिमा के दर्शन के बाद श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर
 महादेव के दर्शन करेंगे। कहते हैं यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। उज्जैन के अलावा दुनिया में
कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है। ऐसी मान्यता है कि नागपंचमी के दिन खुद नागदेव मंदिर में मौजूद रहते हैं
और किस्मत वालों को ही इस एक हजार वर्षीय नागदेवता के दर्शन होते हैं।
मनमोहक प्रतिमा है नागचंद्रेश्वर की
उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के सबसे ऊपरी तल पर बने इस मंदिर के दर्शन करने लाखों लोग
 यहां नागपंचमी के दिन पहुंचते हैं। नागचंद्रेश्वर के दर्शनों के लिए एक दिन पहले ही यहां श्रद्धालुओं को
लंबी कतारें लग जाती हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही दाईं ओर भगवान नागचंद्रेश्वर की मनमोहक प्रतिमा के
 दर्शन होते हैं। शेषनाग के आसन पर विराजित शिव-पार्वती की सुंदर प्रतिमा के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं

को धन्य मानते हैं। यह प्रतिमा मराठाकालीन कला का उत्कृष्ट नमूना है। यह प्रतिमा शिव-शक्ति का साकार रूप है

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