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मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

Anmol Moti !! { 7 }

ईर्ष्या --ईर्ष्या करने वाले का सबसे बड़ा शत्रु उसकी ईर्ष्या है --तिरुवल्लुवर
ईर्ष्यालु  को मृत्यु तुल्य दुःख भोगना पड़ता है --वेदव्यास 
उत्साह--उत्साह मनुष्य की भाग्यशालिता का पैमाना है ---तिरुवल्लुवर 
उत्साह से बढ़ कर दूसरा कोई बल नहीं है उत्साही मनुष्य के लिए संसार की कोई वास्तु दुर्लभ नहीं है --वाल्मीकि 
विश्व इतिहास में प्रत्येक महान और महत्त्व पूर्ण आंदोलन उत्साह द्वारा ही सफल हो पाया है --एमर्सन 

उदारता --यह मेरा है यह दूसरे का ऐसा संकीर्ण हृदय वाले मानते हैं उदार चित्त वालों के लिए यह सम्पूर्ण संसार ही एक कुटुंब है --हितोपदेश 
उदार व्यक्ति दे दे कर अमीर बनता है और लोभी व्यक्ति जोड़ जोड़ कर गरीब बनता है --एक जर्मन कहावत 
यदि एक गरीब के पास एक रोटी होती है तो वह आधी गरीब को देता है और आधी खता है किन्तु यदि एक राजा के पास एक मुल्क है तो वह एक मुल्क और चाहता है --शेख सादी 
चार तरह के लोग होते हैं १. मक्खीचूस -जो न खुद खाता  है न दूसरों को देता है २. कंजूस --जो आप तो खाये पर दूसरे को ना दे ३. उदार --जो आप भी खाये और दूसरों को भी दे ४.दाता --जो आप न खाये और दूसरों को दे --अफलातून 
उधार--न उधार दो न उधार लो ---शेक्सपियर 
उधार मांगना भीख माँगने से अच्छा नहीं है --अज्ञात 
उधार वह मेहमान है जो एक बार आकर वापस नहीं जाता ----प्रेमचंद 
उन्नति--यदि एक मनुष्य की उन्नति होती है तो उसके साथ पूरे मुल्क की उन्नति होती है एक व्यक्ति का पतन तो मुल्क का पतन--गाँधी 
वही उन्नति कर सकता है जो स्वयं को उपदेश देता है ---रामतीर्थ 
हृदय की विशालता ही उन्नति की नीव है --जवाहर लाल 
त्रुटियों के संशोधन का नाम उन्नति है --लाला लाजपत राय 
उन्नति चाहने वाले व्यक्ति को निद्रा,तन्द्रा,भय,क्रोध,आलस्य और दीर्घसूत्रता के अवगुण त्याग देने चाहिए --हितोपदेश 
उपकार --पेड़ अपने सर पर गर्मी सह लेता है लेकिन अपनी छाया से औरों को धुप से बचाता  है  --कालिदास 
जिसने पहले तुम्हारा उपकार किया हो वह यदि बड़ा अपराध करे तो भी उसका उपकार याद कर उसे क्षमा कर दो --महाभारत 
जो दूसरों पर उपकार जताने का इच्छुक है वह द्वार खटखटाता है जिसके हृदय में प्रेम है उसके लिए द्वार खुले हैं--प्रेमचंद 
यदि तू किसी एक आदमी की भी तकलीफ दूर कर दे तो हज पर जाने और एक हज़ार रकअत नमाज़ पढ़ने से अच्छा है --शेख सादी 
वह वृथा नहीं जीता जो अपना धन तन ,मन और वचन दूसरों की भलाई  में लगाता  है --हिंदुत्व 

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