लोभ --लोभ की पूर्ति कभी नहीं होती इसलिए लोभ ले साथ क्षोभ सदा बना रहता है --रामदास
जिस व्यक्ति पर धन का लोभ छा गया उसने अपनी ज़िन्दगी के खलिहान को हवा में उड़ा दिया --शेख सादी
मनुष्य बूढा हो जाता है परन्तु लोभी कभी बूढा नहीं होता --सुदर्शन
एक सुस्पष्ट पुरस्कार का लोभ हमारे स्थूल प्रयत्न के अनुकूल है --टैगोर
लोभ भी छूत की बीमारी है --शरतचंद्र
जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक किसी भी अवस्था में लोभ का परित्याग करना कठिन है --वेदव्यास
वचन--सच्चे हृदय से निकला हुआ वचन कभी निष्फल नहीं होता --गाँधी
जहाँ वचन भ्रष्ट ,वहां मन भ्रष्ट है --अज्ञात
हंसी मजाक में भी कड़वे वचन आदमी के दिल में चुभ जाते हैं --तिरुवल्लुवर
वायदा --मिथ्या वादा करने से विनम्र इंकार अच्छा है --इ पी डे
सच्चे हृदय का बलवान व्यक्ति अपना वायदा पूरा करने से कभी मुंह नहीं मोड़ेगा --नेपोलियन
वासना -- वासना की दीवानगी थोड़ी देर रहती है किन्तु उसका पछतावा बहुत देर--शिलर
जब तक वासना है तब तक कर्म जारी रहेंगे,कर्म समाप्त करना है तो वासना को मारना होगा ,और वह भगवान् का नाम लेने से मरती है --चैतन्य
वासना खोते सोने के सामान चमकती तो बहुत है परन्तु परीक्षा की अग्नि में पद कर उसकी चमक स्थिर नहीं रहती --सुदर्शन
विचार --विचार चाहे पुराना हो और बहुत बार प्रस्तुत किया जा चूका हो लेकिन आखिरकार वह है उसका जो उसे सुन्दर ढंग से प्रस्तुत करे --लावेल
जैसे हमारे विचार होते हैं वैसी ही हमारी शारीरिक स्थिति होती है यदि हम चाहें की हमारी शारीरिक स्थिति विपरीत हो तो यह असंभव है --स्वेट मॉर्डन
विचारों का अजीर्ण आत्मा को बिगाड़ देता है --गांधी
जो विचार कार्य रूप में परिणत नहीं होता उसकी तुलना गर्भस्थ से की गई है
अपने विचारों को अपना बंदीगृह न बनाओ --शेक्सपियर
मनुष्य जैसा अपने हृदय में विचारता है वैसा बन जाता है --बाइबिल
महान विचार जब कार्यरूप में परिणत हो जाते हैं तब कृतियाँ बन जाती हैं --हैज़लिट
अच्छी तरह से अपने विचारों की रक्षा करो क्योंकि विचार स्वर्ग में सुने जाते हैं --यंग
विचार से अधिक ठोस वस्तु ब्रम्हांड में नहीं है --एमर्सन
वे व्यक्ति कभी अकेले नहीं जिनके साथ सुन्दर विचार हैं --पी सिड्नी
विचार का दीपक बुझ जाने पर आचार अँधा हो जाता है --विनोबा
जिस व्यक्ति पर धन का लोभ छा गया उसने अपनी ज़िन्दगी के खलिहान को हवा में उड़ा दिया --शेख सादी
मनुष्य बूढा हो जाता है परन्तु लोभी कभी बूढा नहीं होता --सुदर्शन
एक सुस्पष्ट पुरस्कार का लोभ हमारे स्थूल प्रयत्न के अनुकूल है --टैगोर
लोभ भी छूत की बीमारी है --शरतचंद्र
जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक किसी भी अवस्था में लोभ का परित्याग करना कठिन है --वेदव्यास
वचन--सच्चे हृदय से निकला हुआ वचन कभी निष्फल नहीं होता --गाँधी
जहाँ वचन भ्रष्ट ,वहां मन भ्रष्ट है --अज्ञात
हंसी मजाक में भी कड़वे वचन आदमी के दिल में चुभ जाते हैं --तिरुवल्लुवर
वायदा --मिथ्या वादा करने से विनम्र इंकार अच्छा है --इ पी डे
सच्चे हृदय का बलवान व्यक्ति अपना वायदा पूरा करने से कभी मुंह नहीं मोड़ेगा --नेपोलियन
वासना -- वासना की दीवानगी थोड़ी देर रहती है किन्तु उसका पछतावा बहुत देर--शिलर
जब तक वासना है तब तक कर्म जारी रहेंगे,कर्म समाप्त करना है तो वासना को मारना होगा ,और वह भगवान् का नाम लेने से मरती है --चैतन्य
वासना खोते सोने के सामान चमकती तो बहुत है परन्तु परीक्षा की अग्नि में पद कर उसकी चमक स्थिर नहीं रहती --सुदर्शन
विचार --विचार चाहे पुराना हो और बहुत बार प्रस्तुत किया जा चूका हो लेकिन आखिरकार वह है उसका जो उसे सुन्दर ढंग से प्रस्तुत करे --लावेल
जैसे हमारे विचार होते हैं वैसी ही हमारी शारीरिक स्थिति होती है यदि हम चाहें की हमारी शारीरिक स्थिति विपरीत हो तो यह असंभव है --स्वेट मॉर्डन
विचारों का अजीर्ण आत्मा को बिगाड़ देता है --गांधी
जो विचार कार्य रूप में परिणत नहीं होता उसकी तुलना गर्भस्थ से की गई है
अपने विचारों को अपना बंदीगृह न बनाओ --शेक्सपियर
मनुष्य जैसा अपने हृदय में विचारता है वैसा बन जाता है --बाइबिल
महान विचार जब कार्यरूप में परिणत हो जाते हैं तब कृतियाँ बन जाती हैं --हैज़लिट
अच्छी तरह से अपने विचारों की रक्षा करो क्योंकि विचार स्वर्ग में सुने जाते हैं --यंग
विचार से अधिक ठोस वस्तु ब्रम्हांड में नहीं है --एमर्सन
वे व्यक्ति कभी अकेले नहीं जिनके साथ सुन्दर विचार हैं --पी सिड्नी
विचार का दीपक बुझ जाने पर आचार अँधा हो जाता है --विनोबा
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