विजय--स्वयं अपने ऊपर विजय प्राप्त करना सबसे बड़ी विजय है --प्लेटो
विजय ध्येय की प्राप्ति में नहीं है वरन उसको पाने के लिए निरंतर प्रयास करने में है --गाँधी
सर्वोत्तम विजय प्रेम की है जो सदा के लिए विजेताओं को हृदय में बाँध लेती है --अशोक
जो शक्ति के बलबूते पर विजय प्राप्त करता है वह अपने शत्रु पर पूर्णतया विजय प्राप्त नहीं कर पाटा --मिल्टन
मनुष्य युद्ध में सहस्त्रों पर विजय प् सकता है लेकिन जो स्वयं पर विजय पा लेता है वह सबसे बड़ा विजयी --बुद्ध
विद्या -- विद्या एक अमूल्य निधि है --ग्लैडस्टोन
विद्या सदृश्य कोई चक्षु नहीं है --वेदव्यास
विद्या कामधेनु गाय के सामान है --चाणक्य
विद्या स्वयं ही एक शक्ति है
विद्वान् --विद्वान वे व्यक्ति हैं जो अपने ज्ञान के अनुसार आचरण करते हैं
मूर्ख जितना अधिक विद्वान से सीखते हैं उससे कहीं अधिक विद्वान मूर्ख से सीखते हैं --अज्ञात
विद्वान ज्ञान के जलाशय हैं स्त्रोत नहीं --नार्थ कोट
केवल पढ़ लिख कर कोई विद्वान नहीं होता ,जो इन गुणों को --सत्य,ज्ञान,सदाचारिता को धारण करता है वही विद्वान होता है
विपत्ति --विपत्ति से बढ़कर अनुभव सीखने वाला कोई विद्यालय नहीं आज तक नहीं खुला --प्रेमचंद्र
विपत्ति एक हीरक रज है जिससे ईश्वर अपने रत्नो को चमकता है --लेटन
ईश्वर हमको ऐसी कोई विपत्ति नहीं देता जो हमसे सहन न की जा सके --एक कहावत
हे [परमेश्वर मुझे पग पग पर विपत्तियां दे क्योंकि विपत्ति में ही तेरे डा दर्शन होते हैं और तेरे दर्शन से ही मोक्ष मिलता है --कुंती
जब विपत्ति आने वाली होती है तब व्यक्ति दुष्टों की राय पर अमल करने लगता है --अज्ञात
विपत्ति के आने पर अपनी रक्षा के लिए व्यक्ति को अपने पडोसी शत्रु से भी मेल रखना चाहिए --वेदव्यास
विजय ध्येय की प्राप्ति में नहीं है वरन उसको पाने के लिए निरंतर प्रयास करने में है --गाँधी
सर्वोत्तम विजय प्रेम की है जो सदा के लिए विजेताओं को हृदय में बाँध लेती है --अशोक
जो शक्ति के बलबूते पर विजय प्राप्त करता है वह अपने शत्रु पर पूर्णतया विजय प्राप्त नहीं कर पाटा --मिल्टन
मनुष्य युद्ध में सहस्त्रों पर विजय प् सकता है लेकिन जो स्वयं पर विजय पा लेता है वह सबसे बड़ा विजयी --बुद्ध
विद्या -- विद्या एक अमूल्य निधि है --ग्लैडस्टोन
विद्या सदृश्य कोई चक्षु नहीं है --वेदव्यास
विद्या कामधेनु गाय के सामान है --चाणक्य
विद्या स्वयं ही एक शक्ति है
विद्वान् --विद्वान वे व्यक्ति हैं जो अपने ज्ञान के अनुसार आचरण करते हैं
मूर्ख जितना अधिक विद्वान से सीखते हैं उससे कहीं अधिक विद्वान मूर्ख से सीखते हैं --अज्ञात
विद्वान ज्ञान के जलाशय हैं स्त्रोत नहीं --नार्थ कोट
केवल पढ़ लिख कर कोई विद्वान नहीं होता ,जो इन गुणों को --सत्य,ज्ञान,सदाचारिता को धारण करता है वही विद्वान होता है
विपत्ति --विपत्ति से बढ़कर अनुभव सीखने वाला कोई विद्यालय नहीं आज तक नहीं खुला --प्रेमचंद्र
विपत्ति एक हीरक रज है जिससे ईश्वर अपने रत्नो को चमकता है --लेटन
ईश्वर हमको ऐसी कोई विपत्ति नहीं देता जो हमसे सहन न की जा सके --एक कहावत
हे [परमेश्वर मुझे पग पग पर विपत्तियां दे क्योंकि विपत्ति में ही तेरे डा दर्शन होते हैं और तेरे दर्शन से ही मोक्ष मिलता है --कुंती
जब विपत्ति आने वाली होती है तब व्यक्ति दुष्टों की राय पर अमल करने लगता है --अज्ञात
विपत्ति के आने पर अपनी रक्षा के लिए व्यक्ति को अपने पडोसी शत्रु से भी मेल रखना चाहिए --वेदव्यास
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