मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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गुरुवार, 24 मई 2018

Wajood Se : Nigahbaan !!

तुम आये तो आई बहार 
तुम न आते तो क्या होता 
तुमसे ख़ुशी मिली हर बार 
गर होते अकेले तो क्या होता 

गुज़र गई हँसी  ख़ुशी  अब तक 
तुम देते न साथ तो क्या होता 
रोशन कर दी ज़िन्दगी तुमने 
गर अँधेरे होते तो क्या होता 

डूबती उतरती मेरी कश्ती 
तुम पार न लगाते तो क्या होता 
बदहवास सी ढूँढ  रही थी साहिल 
आते न तुम करीब तो क्या होता 

टूट टूट कर बिखरने को थी 
गर तुम सम्हाल न लेते तो क्या होता 
परेशान सी लड़ रही थी परेशानी से 
तुम करते न आसान तो क्या होता 

चली जा रही थी अकेली ही जाने कहाँ 
तुम थामते न हाथ तो क्या होता 
अकेलापन बन रहा था वीरानी 
तुम बनते न बागबान तो क्या होता 

तुम क्या हो क्या कहूं तुमसे 
कब कब क्या दिया तुमने 
मेरी तार तार होती ज़िन्दगी के 
बनते न निगहबान तो क्या होता !!

निगहबान : रखवाला ,बागबान : माली,बदहवास : घबराया हुआ होना ,तार तार होना : टूटना ,साहिल :किनारा 

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