मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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शनिवार, 1 जून 2019

Suraj Chachu !! Part 7

सूरज चाचू  !!
प्रचंड हो रहा ताप तुम्हारा,
विषधर हो नाग मानो  भुजंग 
प्राणी मात्र हो रहा विकल विवश 
लेशमात्र ना मिलता विराम,
उदय तुम्हारा तेज युक्त ,अस्त की तीव्रता तनिक न कम  
ताप प्रति क्षण बढ़ता ,अविलम्ब, मानो हो दबंग दम्भ 
अपराध हमारा है अक्षम्य 
जनसंख्या निर्बंध ,वन वृक्षों का हुआ हनन 
हमने ही पर्यावरण का किया दहन 
दमन चक्र चलाया स्वयं का  हमने  स्वयं 
किन्तु क्षमा प्रार्थी हैं हम पृथ्वी जन 
करते हैं प्रतिज्ञा और प्रण ,
पांच वृक्षों का करेंगे प्रति व्यक्ति रोपण 
दो बच्चों से अधिक न होगा नव जन्म !!

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