जन्माष्टमी , यानी जन्म एक पूर्णावतार का .....
क्या आपको मालूम है कि " every thing is fair in love and war " इस स्लोगन को किसने स्थापित क्या ?
कृष्ण ने उनके अलावा और कोई ऐसा कर ही नही सकता था | कृष्ण के पहले भगवान , मर्यादा पुरुषोत्तम टाइप के होते थे , परशुधारी होते थे | एक हाथ मे चक्र और दूसरे में मुरली ... हुआ क्या कोई ऐसा अवतार कान्हा से पहले ....
भगवान को आम आदमी के स्तर तक कृष्ण बना के लाये | भगवान का आदमी बन जाना , कितना असम्भव कार्य है | राम लोकलाज से चलने वाले तो कृष्ण नीति निपुण और मौके की नज़ाकत भांप फैसला लेने वाले , कहें तो पूरी तरह से प्रैक्टिकल approach | जहां राम आदर्श स्थापित करते , जिसे अपनाना मुश्किल तो वहीं कृष्ण वस्तुजगत के सच सामना करते , विशुद्ध वास्तविक औज़ारों से .... यानी राम आइडियल तो कृष्ण रियल |
कृष्ण भगवान की परिभाषा में paradigm शिफ्ट लाते है | राम पूज्यनीय है आराध्य है , कृष्ण सखा है चुहलें करता , चिढ़ाता , रिझाता , चीजें चुराता , चंचल , शरारती , चितचोर भी | वह फ्रेंड , फिलॉसफर और गाइड की तिहरी भूमिका में है | वह साथ है तो किसी और के साथ की जरूरत नही | कृष्ण का हाथ हमेशा काँधे पर होता है , वह गलबहियां करता है , वह सारथी बनना prefer करता है , रथी नही | वह मेसेंजर है , राजदूत है , diplomat है , लेकिन सिंहासन का लालची नही | किंगमेकर है किंग बनना भी नही चाहता | शान्ति सुख बना रहे तो रणछोड़ भी कहलाने में गुरेज़ नही उसे |
सुदर्शनधारी है परंतु शिशुपाल की सौ गालियां सुनने का धैर्य है उसके भीतर , शक्ति और क्षमा का अद्भुत संयोग | राज्य के बराबर बंटवारे के बजाय बदले में मात्र पांच गाँव लेकर शांतिपूर्ण समझौता करने वाला स्टेट्समैन है वो | गीता का ज्ञान देने वाला , राजधर्म , क्षात्र धर्म सिखलाने वाला , कर्मयोग प्रतिपादित करने वाला योगेश्वर है | ज़रूरत पड़ने पर मनुष्य के समक्ष सृष्टि के विराट वैभव और शक्ति रूप का प्रदर्श कर आदमी को व्यापक सृष्टि के बरक्स उसकी हैसियत बतलाता कृष्ण , तो जाने क्या क्या है ....
ये वही है जिसका हाथ गले में या कंधे पे तो होता है , लेकिन आशीर्वाद की मुद्रा में सर पे कभी नही होता | वह मरता भी है , तो एक बहेलिये के हाथो बिलकुल नार्मल डेथ | उसने अपनी मृत्य को कत्तई चमत्कारिक नही बनाया या उसे बलिदान या उत्सर्ग रूप नही दिया |
वह पैदा भी बिलकुल नॉर्मल डिलीवरी से जेल में होता है , किसी राजमहल में नही | वह सत्ता से सताए हुए , जुल्म पे जुल्म सहने वाले , एक मजबूर मां बाप का बेटा है | उसकी पैदाइश की व्यंजना तो गज़ब की है | क्या कृष्ण जन्म एक निरंकुश , आततायी , अहंकारी साम्राज्य के बिरुद्ध बगावत का रूपक नही रचता ... वह पैदा होने साथ ही अपने मजलूम बाप की बेड़ियां अथवा ज़ालिम की कारा के सींखचों को नही तोड़ता , और तब का वातावरण देखिए , काली रात , घनघोर बारिश , उफनती यमुना | कभी ऐसे काव्यात्मक बिंबों की व्यंजना समझिये और फिर उसे किसी भी आततायी काल मे स्थापित करके देखिए ....
ऐसी डेथ और ऐसी birth आप को और किसी भगवान की न दिखेगी |
आज कृष्ण के जन्म का दिन है | तो जरा कृष्ण के जन्म और जीवन पर भी मनन करें ..... ऐसे ही कोई पूर्णावतार नही हो जाता .....
*जन्माष्टमी की बधाइयां ...*
क्या आपको मालूम है कि " every thing is fair in love and war " इस स्लोगन को किसने स्थापित क्या ?
कृष्ण ने उनके अलावा और कोई ऐसा कर ही नही सकता था | कृष्ण के पहले भगवान , मर्यादा पुरुषोत्तम टाइप के होते थे , परशुधारी होते थे | एक हाथ मे चक्र और दूसरे में मुरली ... हुआ क्या कोई ऐसा अवतार कान्हा से पहले ....
भगवान को आम आदमी के स्तर तक कृष्ण बना के लाये | भगवान का आदमी बन जाना , कितना असम्भव कार्य है | राम लोकलाज से चलने वाले तो कृष्ण नीति निपुण और मौके की नज़ाकत भांप फैसला लेने वाले , कहें तो पूरी तरह से प्रैक्टिकल approach | जहां राम आदर्श स्थापित करते , जिसे अपनाना मुश्किल तो वहीं कृष्ण वस्तुजगत के सच सामना करते , विशुद्ध वास्तविक औज़ारों से .... यानी राम आइडियल तो कृष्ण रियल |
कृष्ण भगवान की परिभाषा में paradigm शिफ्ट लाते है | राम पूज्यनीय है आराध्य है , कृष्ण सखा है चुहलें करता , चिढ़ाता , रिझाता , चीजें चुराता , चंचल , शरारती , चितचोर भी | वह फ्रेंड , फिलॉसफर और गाइड की तिहरी भूमिका में है | वह साथ है तो किसी और के साथ की जरूरत नही | कृष्ण का हाथ हमेशा काँधे पर होता है , वह गलबहियां करता है , वह सारथी बनना prefer करता है , रथी नही | वह मेसेंजर है , राजदूत है , diplomat है , लेकिन सिंहासन का लालची नही | किंगमेकर है किंग बनना भी नही चाहता | शान्ति सुख बना रहे तो रणछोड़ भी कहलाने में गुरेज़ नही उसे |
सुदर्शनधारी है परंतु शिशुपाल की सौ गालियां सुनने का धैर्य है उसके भीतर , शक्ति और क्षमा का अद्भुत संयोग | राज्य के बराबर बंटवारे के बजाय बदले में मात्र पांच गाँव लेकर शांतिपूर्ण समझौता करने वाला स्टेट्समैन है वो | गीता का ज्ञान देने वाला , राजधर्म , क्षात्र धर्म सिखलाने वाला , कर्मयोग प्रतिपादित करने वाला योगेश्वर है | ज़रूरत पड़ने पर मनुष्य के समक्ष सृष्टि के विराट वैभव और शक्ति रूप का प्रदर्श कर आदमी को व्यापक सृष्टि के बरक्स उसकी हैसियत बतलाता कृष्ण , तो जाने क्या क्या है ....
ये वही है जिसका हाथ गले में या कंधे पे तो होता है , लेकिन आशीर्वाद की मुद्रा में सर पे कभी नही होता | वह मरता भी है , तो एक बहेलिये के हाथो बिलकुल नार्मल डेथ | उसने अपनी मृत्य को कत्तई चमत्कारिक नही बनाया या उसे बलिदान या उत्सर्ग रूप नही दिया |
वह पैदा भी बिलकुल नॉर्मल डिलीवरी से जेल में होता है , किसी राजमहल में नही | वह सत्ता से सताए हुए , जुल्म पे जुल्म सहने वाले , एक मजबूर मां बाप का बेटा है | उसकी पैदाइश की व्यंजना तो गज़ब की है | क्या कृष्ण जन्म एक निरंकुश , आततायी , अहंकारी साम्राज्य के बिरुद्ध बगावत का रूपक नही रचता ... वह पैदा होने साथ ही अपने मजलूम बाप की बेड़ियां अथवा ज़ालिम की कारा के सींखचों को नही तोड़ता , और तब का वातावरण देखिए , काली रात , घनघोर बारिश , उफनती यमुना | कभी ऐसे काव्यात्मक बिंबों की व्यंजना समझिये और फिर उसे किसी भी आततायी काल मे स्थापित करके देखिए ....
ऐसी डेथ और ऐसी birth आप को और किसी भगवान की न दिखेगी |
आज कृष्ण के जन्म का दिन है | तो जरा कृष्ण के जन्म और जीवन पर भी मनन करें ..... ऐसे ही कोई पूर्णावतार नही हो जाता .....
*जन्माष्टमी की बधाइयां ...*
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