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शनिवार, 21 मार्च 2020

Dharavahik Upanyas --Anhoni---{53}

घर में अंजुरी ने पिकनिक के बारे में बताया। मम्मी ने अंजुरी से पूछ पूछ कर मेन्यू तैयार किया और कुछ चीज़ें रात को ही तैयार कर दीं थीं। अंजुरी ने कह दिया था कि वह अपनी सहेलियों के ग्रुप और साथ चलने वाले तीनो प्रोफेसर्स के साथ खाना शेयर कर के खाएगी।  उधर कमलेश्वर ने भी रामु काका से कह कर पूरी सब्जी बनवा ली थी। उन्होंने सुबह जल्दी उठ कर पैक भी कर दी और वह पापा के डाइनिंग टेबल पर आने के पहले ही निकल गया।  विश्वनाथ सिंह ने जब रामु काका से उसके बारे में पूछा तो उन्होंने कह दिया कि कमल बाबू तो जल्दी ही चले गए हैं। विश्वनाथ सिंह को लगा शायद किताबें लेने  शहर चला गया हो। वे भी नाश्ता कर के अपने काम पे निकल गए। उन्होंने अपनी ज़मीन के मुहाने एक फार्म हाउस बना रखा था और वे वहीँ रोज ही भेरूसिंह के साथ चले जाया करते थे और शाम को ही आते थे। उस ज़माने में कार रखने वाले गिने चुने लोग हुआ करते थे। विश्वनाथ सिंह स्वयं ही ड्राइव किया करते थे और भेरू सिंह को कार की समस्त जानकारियां थीं तो कार के रख रखाव में उन्हें काफी मदद हो जाती थी।  भेरू सिंह अपने परिवार के साथ विश्वनाथ सिंह के फार्म हाउस के नज़दीक ही उनके दिए एक छोटे से घर में अपनी  के साथ रहता था। ज़मीन के अलग अलग कई टुकड़ों को अलग अलग फसलों के लिए अलग अलग लोगों को बटाई पर दिया गया था। एक टुकड़े पर भेरू सिंह भी बटाई पर काम करता था।  वह वर्षों से विश्वनाथ सिंह से जुड़ा था।  उसकी दोनों बेटियों की शादियां वहीँ रह कर हुईं थीं।  दोपहर का खाना ,भेरू सिंह की पत्नी बनाया करती थी जिसे भेरू सिंह टिफिन में लाकर पहुँचाता था,परोसता भी था। ऐसा शायद ही कोई दिन होता था जब इस दिनचर्या का पालन न होता था। कमलेश्वर की माता के जीवित रहते ,बीमारी में या फिर किसी आनंद उत्सव में इस दिनचर्या का पालन नहीं होता था। 
सभी छात्र छात्राएं समय पर महा विद्यालय पहुँच गए थे। और देरी ना करते हुए वो सभी अपने निर्दिष्ट की ओर चल पड़े थे। सिंधु मैडम ने कहा था कि वे झुण्ड की  न चल कर तीन तीन अथवा दो दो की पंक्ति बना कर चलें।  सभी छात्राओं ने और छात्रों ने अपना सहयात्री चुन लिया था। और अंत में  अंजुरी और कमलेश्वर बच गए थे और सभी मुस्कुराने लगे ,तीनो प्रोफेसर्स भी। चलो चलो ---रुको नहीं ---देर हो जाएगी सिंधु मैडम के आदेश पर वे चल पड़े ---क्रमशः ------

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