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शुक्रवार, 6 मार्च 2020

Halahal Se : By Nirupama Sinha !! Halahal !! { Ucch Varg - 3 }

हलाहल------
धनसंपन्न और ओहदेदार ,
मातपिता के बिगड़े लाल,
अपराधी बन जाते हैं जब ,
काट ना पाते तृष्णा जाल।

बियर पीते इनके लाल,
तीव्र गति से कार चलाते ,
कर्ण कटु संगीत की धुन पर,
पल बढ़ रहे ये नौनिहाल।

धनपतियों की कन्यायें भी,
नाच रही डिस्को के अन्दर,
कटी  से ऊपर पहने टॉप,
नीचे है बस शॉर्ट से शॉर्ट।

रेस्त्रां हो या पी वी आर,
हो जाते हैं इनके दर्शन,
असमंजस में होता है मन,
यह भारत है या है लन्दन।

हीरे जड़ी मुंदरी उंगली में,
और उंगली में है सिगरेट ,
बियर कैन का करती चुम्बन ,
यह मीरा है या मार्गरेट। 

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