नेकी------------------
क्या गरीबी और क्या अमीरी,
अपनी तो जायदाद फकीरी,
ना कुछ लाया ना ले जाना,
क्या लेखा जोखा क्या तहरीरी।
इस सराय में चार दिनों की,
रिहाईश है हमरी तुम्हरी,
फक्कड़ बन कर जियो जिंदगी,
नेक बनो करो नेकी,
सर उठा कर जियो,मरो शान से,
ताकि उस दरबार में यारों,
फख्र से दे सको हाज़री ,
वहां जाना है बारी बारी
मेरी बातें गांठ बाँध लो,
सबक ये पहला और आखरी,
झूठ नहीं यह पूरा सच है,
बातें मेरी खरी खरी!
शब्द अर्थ---तहरीरी--लिखित रूप में,रिहाईश --निवास स्थान
निगहबान-------
तुम आए तो आई बहार,
तुम न आते तो क्या होता,
तुमसे ख़ुशी मिली हर बार,
गर होते अकेले तो क्या होता।
गुजर गई हंसी ख़ुशी अब तक,
तुम देते न साथ तो क्या होता,
रोशन कर दी जिंदगी तुमने,
गर अँधेरे ही होते तो क्या होता।
डूबती उतरती मेरी कश्ती ,
तुम पार न लगते तो क्या होता,
बदहवास सी ढूंढ़ रही थी साहिल,
आते न तुम करीब तो क्या होता।
टूट टूट कर बिखरने को थी,
गर तुम सम्हाल न लेते तो क्या होता,
परेशांन सी लड़ रही थी परेशानी से,
तुम करते न आसान तो क्या होता।
चली जा रही थी अकेली ही जाने कहां ,
तुम थामते न हाथ तो क्या होता,
अकेलापन बन रहा था वीरानी,
तुम बनते न बागबान तो क्या होता।
तुम क्या हो क्या कहूँ तुमसे,
कब कब क्या दिया तुमने,
मेरी तार तार होती जिंदगी के,
बनते न निगहबान तो क्या होता।
निगहबान--रखवाला,बागबान--माली,बदहवास--घबराया हुआ होना,तारतार --टूटना,साहिल--किनारा
पत्थर-----
कभी सोचता नही पत्थर,
वह देखता और सुनता भी नहीं है,
ख़ुशी या गम का उसपर कोई नहीं असर,
कोई उसे उठाकर जो फेंके दूसरे के ऊपर,
तो जख्म खा जाता है वो पुरअसर,
कभी जो इससे लग जाए ठोकर,
गिरता है मुंह के बल,होता है घायल,
और जो कोई गिरे सर के बल,
निकल जाए दम,फट जाए सर,
कुछ भी नहीं करता खुद ब खुद पत्थर,
मेरे जिस्म में,दिल की जगह,उग आया है ,एक पत्थर!
शब्द अर्थ---पुरअसर --असरदार,खुद ब खुद--स्वयमेव
रहमत-------
बज़ाहिर है तेरी नेमत,तेरी फराकत ,
बन्दे हैं तेरे,बंदगी करते हैं तेरी,
नहीं है तुझसे कोई शिकायत,
एतबार है तेरे इन्साफ पे,
चाहे दुनिया करे कितनी ही लानत मलामत,
काज़ी है तू ,तू ही मुंसिफ हमारा,
दुनिया तो रखती है खालिस अदावत,
पत्ता भी तेरे बगैर न हिलता चमन में,
किसकी है हिम्मत किसकी हिमाकत,
जी सकता है इंसान बगैर पाए कोई दौलत,
या शोहरत,
मर जाएगा पल में ,जो ना हो तेरी इज़ाज़त,
तेरी रहमत!
शब्द अर्थ---बज़ाहिर--प्रकट होना,नेमत--कृपा,फराकत --दयादृष्टि,खालिस--शुद्ध,लानत मलामत--कोसना
क्या गरीबी और क्या अमीरी,
अपनी तो जायदाद फकीरी,
ना कुछ लाया ना ले जाना,
क्या लेखा जोखा क्या तहरीरी।
इस सराय में चार दिनों की,
रिहाईश है हमरी तुम्हरी,
फक्कड़ बन कर जियो जिंदगी,
नेक बनो करो नेकी,
सर उठा कर जियो,मरो शान से,
ताकि उस दरबार में यारों,
फख्र से दे सको हाज़री ,
वहां जाना है बारी बारी
मेरी बातें गांठ बाँध लो,
सबक ये पहला और आखरी,
झूठ नहीं यह पूरा सच है,
बातें मेरी खरी खरी!
शब्द अर्थ---तहरीरी--लिखित रूप में,रिहाईश --निवास स्थान
निगहबान-------
तुम आए तो आई बहार,
तुम न आते तो क्या होता,
तुमसे ख़ुशी मिली हर बार,
गर होते अकेले तो क्या होता।
गुजर गई हंसी ख़ुशी अब तक,
तुम देते न साथ तो क्या होता,
रोशन कर दी जिंदगी तुमने,
गर अँधेरे ही होते तो क्या होता।
डूबती उतरती मेरी कश्ती ,
तुम पार न लगते तो क्या होता,
बदहवास सी ढूंढ़ रही थी साहिल,
आते न तुम करीब तो क्या होता।
टूट टूट कर बिखरने को थी,
गर तुम सम्हाल न लेते तो क्या होता,
परेशांन सी लड़ रही थी परेशानी से,
तुम करते न आसान तो क्या होता।
चली जा रही थी अकेली ही जाने कहां ,
तुम थामते न हाथ तो क्या होता,
अकेलापन बन रहा था वीरानी,
तुम बनते न बागबान तो क्या होता।
तुम क्या हो क्या कहूँ तुमसे,
कब कब क्या दिया तुमने,
मेरी तार तार होती जिंदगी के,
बनते न निगहबान तो क्या होता।
निगहबान--रखवाला,बागबान--माली,बदहवास--घबराया हुआ होना,तारतार --टूटना,साहिल--किनारा
पत्थर-----
कभी सोचता नही पत्थर,
वह देखता और सुनता भी नहीं है,
ख़ुशी या गम का उसपर कोई नहीं असर,
कोई उसे उठाकर जो फेंके दूसरे के ऊपर,
तो जख्म खा जाता है वो पुरअसर,
कभी जो इससे लग जाए ठोकर,
गिरता है मुंह के बल,होता है घायल,
और जो कोई गिरे सर के बल,
निकल जाए दम,फट जाए सर,
कुछ भी नहीं करता खुद ब खुद पत्थर,
मेरे जिस्म में,दिल की जगह,उग आया है ,एक पत्थर!
शब्द अर्थ---पुरअसर --असरदार,खुद ब खुद--स्वयमेव
रहमत-------
बज़ाहिर है तेरी नेमत,तेरी फराकत ,
बन्दे हैं तेरे,बंदगी करते हैं तेरी,
नहीं है तुझसे कोई शिकायत,
एतबार है तेरे इन्साफ पे,
चाहे दुनिया करे कितनी ही लानत मलामत,
काज़ी है तू ,तू ही मुंसिफ हमारा,
दुनिया तो रखती है खालिस अदावत,
पत्ता भी तेरे बगैर न हिलता चमन में,
किसकी है हिम्मत किसकी हिमाकत,
जी सकता है इंसान बगैर पाए कोई दौलत,
या शोहरत,
मर जाएगा पल में ,जो ना हो तेरी इज़ाज़त,
तेरी रहमत!
शब्द अर्थ---बज़ाहिर--प्रकट होना,नेमत--कृपा,फराकत --दयादृष्टि,खालिस--शुद्ध,लानत मलामत--कोसना
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