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शनिवार, 7 मार्च 2020

Wajood Se : By Nirupama Sinha !!{133} Rahasymyee !!

रहस्यमयी--------------

आंधी की तरह यकायक आना उसका,
और चले जाना
एक सवाल है,जिसकी तह में हैं कई सवाल,
वह जितनी परिचिता  है,उतनी ही अपरिचिता  सी,
कितनी आत्मीय लगी,आज उतनी पराई सी,
प्रेरिका बनी मेरी वह सखी,
कल तक थी आज नहीं,
थी चंचला सीमाएं लांघती सी,
कभी मधुर,कभी कटु भाषिणी सी,
कभी कठोर,दुःख दायिनी
अल्हड,चहकती स्तरहीन सी,
क्यों न लगी कभी सौम्या
सदैव कुछ ले लेने को आतुर,
देने में अति कृपणा सी,
मेरा मन हो जाता है व्यथित,
जब जब मानस पटल पर ,
उभरती है उसकी छवि,
सोचती रहती हूँ क्यों वह ऐसी था,क्यों वैसी न थी,
प्रश्नों की झड़ी सी,रहस्यमयी!

शब्द अर्थ-- कृपणा --कंजूस 

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