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शनिवार, 7 मार्च 2020

Wajood Se : By Nirupama Sinha !! {73}Musafir !!

मुसाफिर-----

क्या है जिंदगी?
अपनी अपनी गाड़ी का इंतजार करती,
मुसाफिर खाने में जुटी भीड़?
सबके पास होते हैं अलग अलग माल असबाब,
शायद ही कोई बातें करता,
या नजदीकियां बढ़ने की कोशिश करता नज़र आता है,
अपने आप में मशगूल ,
खाने पीने के इंतजाम मे मसरूफ,
कोई बैठे बैठे झपकी मारता कि चोरी न हो जाए असबाब,
कोई फटी चादर बिछा कर खर्राटे भी मार लेता है,
जिसकी गाडी आई,वह उठ कर चल देता है,
और उसी गाड़ी से कोई मुसाफिर उतर कर,
मुसाफिरखाने में उसी जगह आकर बिछा देता है अपना असबाब ,
जहाँ से अभी अभी पिछला मुसाफिर गया है!

शब्द अर्थ---असबाब--सामान,मसरूफ--व्यस्त,

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