विश्वनाथ सिंह अंदर आये और कमलेश्वर को बोले "बाहर आ जाओ "कमलेश्वर उठ कर जब बाहर हॉल में आया तो उसे अपना बड़ा सा हॉल भरा भरा सा लगा। वह रणवीर सिंह को देख कर चौंक गया। दो और भी पुरुष थे जिन्हे वह नहीं जानता था। तीन महिलाएं थीं। दो वयस्क तथा एक युवा ,अरे ! यह तो अंजली है ! वह प्राइमरी स्कूल में मंद बुद्धि बालिका के रूप में सबकी हंसी की पात्र बना करती थी। लम्बे समय बाद उसे देख रहा था। कभी कस्बे के साप्ताहिक बाज़ार में देखा था शायद। साप्ताहिक बाज़ार में चूड़ियाँ खरीद रही थी शायद अपनी माताजी के साथ। हाँ ! माताजी ?यही तो हैं। तभी पापा ने उसे सोफे पर बैठने को कहा। वह बैठ गया। सेण्टर टेबल पर कुछ थालों में कपडे गहने मिठाई इत्यादि सामान रखे थे। अब कमलेश्वर को आभास हुआ कि "यह सब कुछ उसी से सम्बंधित है। "तभी अंजलि को भी उसकी माताजी ने वहीँ सोफे पर ,कमलेश्वर के पास बिठा दिया " दूसरी स्त्री हाथ में अंगूठी की डिबिया लिए आ गई। उसने वह अंगूठी अंजलि के हाथ में दे दी ,तभी पापा भी कमलेश्वर के पीछे आ खड़े हुए ,उन्होंने अंगूठी की डिबिया कमलेश्वर के हाथ में दे दी। अब तक कमलेश्वर समझ चुका था कि उसकी सगाई हो रही थी अंजलि के साथ ,पापा की आँखों में वह आदेश देख चुका था,उसे अंजुरी याद आ गई ,उसे यह भी याद आया कि लगभग एक सप्ताह पहले वह अंजुरी की मांग में सिन्दूर भर चुका था। अंजुरी का क्रोध ,उसके प्रश्न ,उसकी शंकाएं सब कुछ उसके सामने थे ,किन्तु उसके पास पापा विरोध तो दूर ,कुछ पूछने की भी हिम्मत भी नहीं थी। उसने डिबिया खोल कर अंगूठी निकाली और अंजलि के बढे हुए बाएं हाथ की अनामिका में पहना दी। पापा वहीँ खड़े थे उन्होंने एक थाल कमलेश्वर को दिया और इशारा किया ,उसने वह भी अंजलि की ओर बढ़ा दिया ,जिसे अंजलि की माता जी ने ली लिया। तब पापा ने कमलेश्वर को बांया हाथ बढाने को कहा ,उसने निर्विरोध वही किया ,अंजलि की माताजी ने उसे धीरे से कहा ,और उसने कमलेश्वर की अनामिका में अंगूठी पहना दी। फिर उन्होंने भी एक थाल अंजली को दिया और कमलेश्वर की ओर बढ़ाने को कहा ,कमलेश्वर ने उसे ले लिया ,उसमे सोने की मोटी सी चेन और कुछ कपडे थे। उसके थाल लेते ही सभी तालियां बजाने ने लगे और एक दूसरे को बधाइयाँ देने लगे। रामु काका ,मिश्री और इमरती भी द्वार पर खड़े देख रहे थे। अब तत्परता से प्लेटों में नाश्ता ,मिठाई इत्यादि लाकर टेबलों पर सजाने लगे। कमलेश्वर उन सबकी बातों से जान गया ,वह दूसरी स्त्री अंजलि की बुआ और दूसरा व्यक्ति उसके फूफाजी जी थे। सभी हँसते बोलते नाश्ता करने लगे। कमलेश्वर की सारी भूख ख़त्म हो गई थी ,वह धीरे धीरे पूरी के टुकड़े कर के मुंह में डाल रहा था। ----क्रमशः -----
मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts
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