मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

मेरी फ़ोटो
I love writing,and want people to read me ! I some times share good posts for readers.

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2020

Dharavahik Upanyas---Anhoni---{85}

इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी दिवाकर वशिष्ठ को वहीँ हॉस्पिटल में छोड़ कर थाने चले गए। उन्होंने  उमेश साहू,महेंद्र सक्सेना ,राजेश दवे ,तीनो को आगे का कार्य समझाया। उन्होंने तीनो से कहा कि ,वे बॉडी के पोस्टमार्टम के लिए शहर जिला अस्पताल जा रहे हैं ,यहाँ के डॉक्टर साहब ने ही ऐसा सुझाव दिया है। अनिरुद्ध चौधरी ने उन्हें मृत देह प्राप्त होने का सही स्थान वर्णित किया और उनसे कहा ," यदि उसने टेकरी से कूद कर आत्महत्या की है,या उसे किसी ने धकेल दिया है , तो वहां सील कर देना तुम्हे वहां की बाउंड्री टूटी हुई मिलेगी। वहां आसपास भी अच्छी तरह छानबीन करना ,शायद उसका कुछ सामान ,किताबें मिले.यद्यपि उसकी माताजी ने उसे जाते हुए थी ठीक से नहीं देखा था ,अतः वो बता ना सकीं। 
उसके[पश्चात् दूसरी ओर घूम कर जाना ,जहाँ से उसकी मृत देह प्राप्त हुई ,वहां भी अच्छी तरह से छान बीन करना,हो सकता है कि वहां उसका कोई सामान मिले। इतना कहकर इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी निकल गए। उन्होंने दिवाकर वशिष्ठ की मदद से बॉडी को जीप में रखवाया और जिला अस्पताल की ओर निकल पड़े। उन्होंने देखा तहसील के बाहर ही तहसीलदार अनमोल ठाकुर और उनकी पत्नी तहसील के बाहर ही खड़े थे। रघुनाथ भी उनकी जीप के साथ तैयार था। जीप में उनका काफी सारा सामान था। 
वे दोनों ही पुलिस जीप में अंजुरी की मृत देह के साथ ही बैठे। इतनी कम अवधि में भी अंजुरी की माताजी की आँखें रो रो कर लाल हो चुकीं थीं ,और वे निरंतर रो रहीं थीं। तहसीलदार साहब ने बताया कि वे भी शहर के ऑफिस से दो दिन की छुट्टी लेकर अंजुरी की माताजी को उनकी माताजी के गांव छोड़ दूंगा। उन्होंने अंजुरी के कमरे की चाभी अनिरुद्ध चौधरी को सौंप दी। वे जितने ही आनंदी प्रवृत्ति के थे उतने ही आहत दृष्टिगत हो रहे थे। आज मार्ग में यातायात भी नहीं था वे लोग दोपहर से पहले ही अस्पताल पहुँच गए।  अंजुरी की माताजी को अत्यंत कठिनाई से उस जीप से उतारा गया। तत्पश्चात तहसीलदार साहब अपनी पत्नी के साथ दूसरी जीप में जा बैठे। उन्होंने बताया कि वे आधे पौने घंटे में वापस अस्पताल पहुँच जायेंगे। उन्हें विशेष कोटे से टिकिट की व्यवस्था करनी पडी। और वे अस्पताल पहुँच गए उन्होंने रघुनाथ को वापस कर दिया। उन्होंने उच्च कार्यालय से  परिस्थतिजन्य आकस्मिक अवकाश  ले लिया। --क्रमशः -

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dharavahik crime thriller ( 241) Apradh ! !

The bus was ready to move both of them climbed up and occupied two seats. They were involved in their own thoughts so didn’t talk to each ot...

Grandma Stories Detective Dora},Dharm & Darshan,Today's Tip !!