मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

मेरी फ़ोटो
I love writing,and want people to read me ! I some times share good posts for readers.

सोमवार, 4 अप्रैल 2022

Dharm & Darshan !! Prabhu Smaran !!

*प्रार्थना की शक्ति*


एक बूढ़ी औरत सब्जी की दुकान पर जाती है। लेकिन उसके पास सब्जी खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। वह दुकानदार से सब्जियाँ उधार देने की प्रार्थना करती है। लेकिन दुकानदार मना कर देता है। बार-बार आग्रह करने पर दुकानदार कहता है, "यदि तुम्हारे पास कोई मूल्यवान वस्तु है, तो उसे इस पैमाने पर रख दो। मैं तुम्हें उसके तौल के बराबर सब्जी दूँगा।"


बुढ़िया ने कुछ देर सोचा। उसके पास ऐसा कुछ नहीं था। कुछ देर सोचने के बाद वह एक कागज़ का टुकड़ा निकालती है और उस पर कुछ लिख देती है और उसे तराजू के एक तरफ वाले पलड़े पर रख देती है।


यह देख दुकानदार हँसने लगता है। फिर भी वह कुछ सब्जियाँ उठाता है और उसे तराजू के दूसरी तरफ रखता है और हैरान रह जाता है! कागज वाला पलड़ा नीचे ही रहता है और सब्जी वाला ऊपर चला जाता है। फिर वह कुछ और सब्जियाँ डालता है लेकिन कागज वाला पलड़ा ऊपर नहीं जाता है। अब दुकानदार कुछ ओर सब्जियाँ डालता है लेकिन कागज की तरफ वाला तराजू का पलड़ा फिर भी नीचे ही रहता है।


बार बार सब्जियाँ रखने के बाद भी जब कागज की तरफ वाला पलड़ा ऊपर नहीं उठा तो दुकानदार तंग आकर के कागज को ही उठा लेता है और पढ़ता है। 


कागज पर लिखा था, *"हे भगवान, तुम पालनहार हो, अब सब कुछ तुम्हारे हाथ में है।"* ये पढ़कर दुकानदार बहुत चकित रह जाता है। दुकानदार को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं होता है और वह बार-बार कागज को पढ़ने लगता है लेकिन उसे जब कुछ समझ नहीं आता है तो वह बिना कुछ कहे बूढ़ी औरत को सब्जियाँ दे देता है।


एक और ग्राहक भी वहीं पर खड़े थे ओर ये सब देख रहे थे। उन्होंने दुकानदार को समझाते हुए कहा, "चौंकिए मत। इस कागज पर उन वृद्ध महिला ने दिल से प्रार्थना लिखी थी और प्रार्थना का मूल्य तो केवल भगवान ही जानता है।"


हमें भगवान से प्रार्थना करने की जरूरत है, हमें उनसे अनुरोध करने की जरूरत है कि वे हमारे जीवन में उनकी उपस्थिति का अनुभव करने में हमारी मदद करें।


चाहे वह एक घंटा हो या एक मिनट, सच्चे मन से याद किया जाए तो ईश्वर जरूर मदद करते हैं। इस कहानी में सब्जी विक्रेता ने ग्राहक की प्रार्थना के रूप में भगवान की उपस्थिति का अनुभव किया।


हम भगवान को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख सकते हैं, लेकिन हम बहुत सूक्ष्म कंपन के माध्यम से उनकी उपस्थिति का अनुभव कर सकते हैं। हमें उनको सुनने के लिए मौन का अभ्यास करने की आवश्यकता है.. क्योंकि ईश्वर की भाषा मौन है, जो अपने आप में ही पूर्ण है।


अक्सर लोगों के पास यह बहाना होता है कि हमारे पास समय नहीं है। लेकिन सच तो यह है कि ईश्वर को याद करने का कोई समय नहीं है। 


_वास्तव में, हमें अपने प्रत्येक कार्य में ईश्वर को अपना भागीदार बना लेना चाहिए। जब हम उनके बारे में सोचते हैं, तो हमारी समस्याओं के प्रति हमारी धारणा भी बदलने लगती है, क्योंकि तब हम इसे उत्कृष्ट होने के अवसर के रूप में देखते हैं।_

*"प्रेम और भक्ति से भरे हृदय से की गई प्रार्थना कभी अनसुनी नहीं जाती।"*

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dharavahik crime thriller ( 234) Apradh !!

Mr. & Mrs Sharma  everything dou on their own. They then went to Sujay’s hostel . Collected his luggage and packed it properly. They inf...

Grandma Stories Detective Dora},Dharm & Darshan,Today's Tip !!