देर तक मम्मी के कानों में अंजलि के द्वारा फुसफुसाए हुए शब्द गूंजते रहे । “ अलविदा अलविदा “ यही तो बोला था उसने । अभी तो वह शादी की तैयारियों में उत्साह से व्यस्त दिख रही थी और दूसरी ओर न जाने क्यों सभी प्रकार के क़ानूनी दस्तावेज़ों को अंतिम रूप दे रही थी । पूछने पर बस यही कहती थी कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने क़ानूनी दस्तावेज़ों की देखभाल करते रहनी चाहिए । कार भी कभी मंथर और कभी तीव्र गति से चल रही थी और अंजलि और कमलेश्वर के मन में भिन्न दिशाओं की ओर उठते प्रश्नों के तिनके भी कभी इधर कभी उधर उड़ रहे थे । बेटी का विवाह वैसे भी सभी अभिभावकों के लिये जीवन का सबसे कठिन प्रश्न पत्र होता हैं । बेटी का ससुराल कैसा होगा ? सास ससुर कैसे होंगे ? पति उसका ध्यान रखेगा अथवा नहीं तथा स्वयं उनकी बेटी उस अपरिचित घर में अपरिचित लोगों के बीच सही रूप से सामंजस्य बिठा पाएगी या नहीं ? ये कई सारे प्रश्न बारी बारी से इन्हें आत्म मंथन करने को बाध्य कर रहे थे ।” क्या सोच रहे हो ? अंजलि के शब्दों से कमलेश्वर की तंद्रा भंग हुई । “ कुछ नहीं आरती के बारे में सोच रहा था , ईश्वर करे वह अपनी ससुराल में बहुत प्रसन्न रहे और वहाँ के सभी लोगों को प्रसन्न रखे “ “ इतनी चिंता क्यों करते हो सब ठीक होगा “ “ हाँ तुम जब भी कहती ही सब ठीक होगा तो वास्तव में सब ठीक ही होता है “ मैं तुम्हारे शब्दों से बहुत आश्वस्त हो जाता हूँ “ तुम्हारे मेरे जीवन में आने के बाद से सभी समस्याएँ बस आई गई ही रहीं मुझे उन्हें सुलझाने के लिए कभी जूझना नहीं पड़ा “ अंजलि मुस्कुरा रही थी लेकिन उसके मस्तिष्क में भावनाओं का बवंडर उठ रहा था । ———— कंटिन्यू ———
मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts
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