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गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

Dharavahik Upanyas Anhoni (300 Last Part )

अगला दिन आरती के विवाह का शुभ दिन था और चूँकि अंजलि ने ज़िद की थी कि टेकरी वाले मंदिर में ही फेरे होंगे और फेरे करवाने वाले वही पंडित जी होंगे जिन्होंने अंजलि और कमलेश्वर के फेरे बीस वर्ष पूर्व करवाये थे । हाँ पंडित जी अब वृद्ध हो चले थे । कमलेश्वर सहित सभी को यह ज़िद अजीब सी लगी थी । बीस वर्ष पहले की और आज की स्थिति में कितना परिवर्तन हो चुका था । फ़ैशन बदल चुका था । लेकिन अंजलि ने सबको संतुष्ट करते हुए यह भी कहा था कि फेरों के बाद दूल्हा दुल्हन रिसेप्शन के लिये सजाये हुए बड़े से टेंट में स्टेज पर लगी दूल्हा दुल्हन की सजी हुई कुर्सियों पर बैठेंगे । विवाह का मुहूर्त भी प्रातः दस साढ़े दस का था । सभी अलार्म लगा कर ही उठे । विवाह संबंधित सामग्री शाम को ही मंदिर में रखवा दी गई थी । उन दिनों दुल्हन के ब्यूटी पार्लर जा कर सजने धजने का रिवाज नहीं था । आरती ने स्वयं ही अंजलि की मदद से साड़ी पहनी आभूषण पहने थोड़ा बहुत लाली पाउडर लगा लिया । अंजलि में भी आज अपनी पुरानी विवाह के समय की साड़ी पहनी और वे ही आभूषण पहने । पुरुष लोग पहले से ही तैयार खड़े थे । अंजलि ने आरती को बाहर जाकर कार में बैठने को कहा और कहा कि पापा को भेज दे , कुछ काम है । आरती ने हाँ में सर हिलाया और चली गई । कमलेश्वर तेज़ी से अंदर आया “ क्या हुआ ? कुछ छूट गया है क्या ? “ अंजलि उससे लिपट गई , “ हाँ कमल सब कुछ छूट रहा है , अलविदा अलविदा “ “ ये क्या पागलपन है , चलो बाहर सब प्रतीक्षा कर रहे हैं । “ अंजलि सामान्य होकर बाहर आ गई । टेकरी पर बिना थके चढ़ गई ।दूल्हा दुल्हन को वेदी के पास बिठा दिया था । अंजलि ने आरती के माथे पर चुंबन अंकित किया और मंदिर की ओर बढ़ी । हाथ जोड़े , और पलट कर पुनः वेदी की ओर लौटते हुए उसी स्थान पर गिर पड़ी जहां बीस वर्ष पहले भी गिर गई थी । कमलेश्वर ने घबरा कर उसके चेहरे पर पानी के छींटे मारे । उसने आँखें खोल दी । “ हमे माफ़ कीजिये “ उसकी बोली अलग सी थी । चलो जल्दी , पंडित जी कन्यादान के लिये प्रतीक्षा कर रहे हैं । “ किसका ? अरे तुम्हारी बिटिया आरती का ? हैएँ का बोल रहें हैं अभी तो हमारी शादी भी नहीं हुई है — सभी आश्चर्य चकित से उसे देख रहे थे और वह स्वयं आश्चर्य चकित सी सबके चेहरों पर बुढ़ापे की लकीरें और बालों की सफ़ेदी देख रही थी “ अचानक से उसके चेहरे में अँजुरी का चेहरा झलका , और कमलेश्वर समझ गया , वो अँजुरी थी जो बीस वर्ष अंजलि के रूप में उसकी पत्नी बन कर रही और आरती को उसे सौंप कर चली गई “ ————- समाप्त ————

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