मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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गुरुवार, 17 जनवरी 2013

Bikhare Panne : Ek Thi Nirupama !! {98}

शकुंतला की माँ परंपरागत कान्चरी  कुर्ती पहनती थी।घर के बाहर एक बड़ा सा मुर्गी का दरबा था।सुबह उठते ही वो दरबे का दरवाजा खोल देते और मुर्गियां मुर्गे और उनके बच्चे दिन भर इधर उधर दाना चुगते ,कुत्ते भी इर्द गिर्द होते पर कभी भी किसी ने मुर्गी के बच्चे तक को न दबोचा।शाम होते ही आओ आओ की आवाज दी जाती और अनुशासित फ़ौज की तरह मुर्गे मुर्गियां दरवाजे में प्रवेश कर जाते।शकुंतला का घर मिटटी का ही था और पांडू से लिपा  हुआ था।नीचे एक कमरा और मिटटी की सीढ़ी से जाकर ऊपर दो कमरे,एक खिड़की ऊपर फर्श से जुडी जिसमे से वह हमेशा झांकती रहती थी।हम लोग साथ स्कूल जाते और साथ आते भी थे।आने के बाद सब्जी लाने भी साथ जाते।यह हमारा रोज का रूटीन था,शकुंतला को पढ़ाई वगैरह में जब भी किसी मदद की जरूरत होती वह हमारे घर आ जाती थी----क्रमशः----

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