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बुधवार, 16 जनवरी 2013

Wajood Se---By Nirupama Perlekar Sinha


दर्द-------
दर्द की जुबां नहीं होती,
दिखाई भी नहीं देता है दर्द,
गर सुनने की करें कोशिश,
सुनाई पड़ेंगी आहें, सिसकियाँ,
या रोना किसी का ज़ार ज़ार ,
कभी होता है ये हलकी सी कसक,
फांस चुभने से उठने वाली टीस की मानिंद,
और कभी नश्तर चल जाने सा,
किसी गहरे ज़ख्म से उठता,
चींखता चिल्लाता है दर्द,
कभी घुटन बन कर खामोश रह जाता है दर्द,
कभी बहता है अश्क बन कर आँखों से ,टप टप
बन जाता है उन्ही का समंदर कभी,
और सैलाब ले आता है दर्द,
डुबो  देता है गहरी दोस्ती,
अज़ीज़ रिश्ते,
अज़ीम सल्तनतें ,
जब गहरा दाग बन जाता है दर्द!

शब्द अर्थ---ज़ार  ज़ार --फूट फूट कर,सैलाब -बाढ़,अज़ीज़-बहुत अपना,अज़ीम-विशाल 
मानिंद-तरह ,नश्तर-छुरी 



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