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बुधवार, 16 जनवरी 2013

Halahal Se---By Nirupama Perlekar Sinha---Halahal---Madhya Varg !! {Antim}

हलाहल--------

छूट रहा इनके हाथों से ,
नैतिकता का उजाला दामन,
जुटने को तैयार हैं वे भी,
अर्जित करने को कला धन।

उसने भी अब मूँद ली आँखे,
अच्छाई से सच्चाई से,
क्या क्या पा सकता है वह भी ,
दो हाथों की कमाई से।

पा लेगा ऐश्वर्य के साधन ,
वह भी होगा अब धनवान,
अपने बच्चों का एडमिशन ,
करा लेगा वह दे दोनेतिओन।

इनकी म्रत्यु दे जाती है,
एक अभाव एक खालीपन,
क्यों करती है म्रत्यु ऐसे ,
सच्चे लोगो का आलिंगन।

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