गद्दारों की जमात –
आलिशान बंगलों के,
एयर कंडीशंडड्राइंग रूम में,
बियर औरवाइन की चुस्कीके साथ
करते रहते हैंचर्चा परिचर्चा ,
मजदूरों की, किसानोंऔर आदिवासियों की,
आम आदमी केबन हमदर्द,
बुलंद कर रहे साम्यवाद का झंडा
ब्रांडेड जीन्स ब्रांडेड शर्ट्सब्रांडेड जूते ,
माल्स कीसैर ,मल्टीप्लेक्स मेंफ़िल्में,
शाही ठाठ बाठमें दिखतें,
मुझको साम्यवाद ,समाजवाद के नेता,
लेकिन अब जोचेहरा उघडा,
हो गया सारादेश ही दंग,
खाद पानी डालडाल के , प्रदूषितसोच से सींचसींच के
गद्दारों ने देखो, पैदा कर लीगद्दारों की पौध,
शिक्षण संस्थानों को देखो,
बना रखा हैजिनका अड्डा
आतंकवादी को दिखा शहीद ये
बुलंद कर रहे उसका जयकारा,
लानत है उन सारों पर
जो बजा रहे इन तकरीरों पे ताली
मुझको लगता है मानो उनका
ऊपरवाला माला है खाली,
शिक्षा पाने के स्वर्णिम काल में
बने हैं घाघ नेताओं की कठपुतली
क़ानून कभी ना बख्शेगा,
गद्दारों को उनकी सजा मिलेगी
लेकिन ताली पीटने वालों
तुम खाओ जनता की गाली !!
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