मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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मंगलवार, 15 मार्च 2016

Early March --London to --March End India ---Suraj Chachu--6

Early March --London to --March End India ---Suraj Chachu--6
गुनगुनी सुहानी धूप तुम्हारी
माँ की याद दिलाती है
कड़ी ठण्ड में कितने प्यारे
मन भावन ,भरमाते हो !

पंद्रह दिन के बाद दिखेगा
मुझे तुम्हारा रौद्र रूप,
क्यों तुम मेरे देश में इतनी
गरम आग बरसाते हो !

किसी निरंकुश राजा से तुम
हुकूमत ,अपनी चलाते हो
गर्मी से निजात ,ना मिले किसी को
त्रस्त हमें कर जाते हो !

कहीं पंखा,कहीं कूलर कहीं ए सी
तुम ही तो चलवाते हो
खामख्वाह ही बिजली का बिल
तुम ही तो बढ़वाते हो

निरीह पशु पक्षी गर्मी से हांफें,
तुम तरस ज़रा ना खाते हो
नायक हो,अधिनायक हो
क्यों वसुधा को यूँ झुलसाते हो !

तुम बिन सारी  सृष्टि शून्य है
तुमसे ही सार्थकता सबकी
वैदिक युग से ,परम्परागत ,
आज भी पूजे जाते हो !!!

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