ज़िन्दगी और मौत------
माँ की कोखसे मरघट तकका सफर बड़ानहीं है बहुत
जाने, समझा बूझाया अकस्मात है
कभी जगमग जगमगकभी घुप्प अँधेरा
जादुई तिलिस्मात है
ये सिर्फ सफर हीसफर है ,कोईमंज़िल नहीं इसकी
बस आयी गयीबात है
दौरान - ए - सफरहोते हैं कईलोग ,कुछ कहलातेहैं अपने
कुछ का थोड़ासा ही साथहै
आखरी पड़ाव तक,शायद हीकोई होगा आपकेसाथ ,
सबके अपने अपनेहालात हैं
जो तकलीफें हैं आपकी,ज़ेहनी या जिस्मानी
वो सिर्फ आपको हीकरनी बर्दाश्त हैं
उन्हें बाँट सकतानहीं कोई
बस मुद्दे की यहीबात है
खुशियों में लगजाते हैं मेले,तकलीफ में अकेले
बस यही तोकरामात है
हर एक हैउलझा हुआ ,सुलझानेमें अपनी मुश्किल
उखड़े उलझे सेसबके जज़्बात हैं
किसी पर तोहमत,फ़िज़ूल है
जाने किस मुश्किलमें मुब्तिला हो
छोडो जाने भीदो ,ये उसकाअखलाक़ {फलसफा} है
सबको जीने दोअपनी अपनी ज़िन्दगी
उसके पास भीतो ,ये हीएक अदद ऊपरवालेकी सौगात है
जितनी भी लिखीहैं साँसों कीलड़ियाँ ,जीने कीघड़ियाँ
तय शुदा हैं सारी की सारी,
ऊपरवाले का बड़ा पक्का हिसाब है
फिर भी ,ऊपर देखो ,शुक्राना करो अदा ,
ऐ ऊपर वाले ! तू ,और तेरी कायनात
बस ये ही तो लाजवाब है
शायद सोच रहे हैं आप ,
ये लिखती बड़ी कड़वी बात है
या मुस्कुरा रहे हैं आप
देखो कितने मिलते जुलते अपने खयालात हैं !!
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